नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के तत्वावधान में मंगलवार को हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती मनाई गई। संस्था के रोहिणी स्थित कार्यालय में इस अवसर पर एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य आज भी प्रासंगिक हैं।
संस्था के महासचिव दयानंद वत्स की अध्यक्षता में ‘प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित परिचर्चा प्रेमचंद के साहित्य के सभी पात्रों की प्रासंगिकता रेखांकित की गई।
वक्ताओं ने कहा, “प्रेमचंद के लाखों होरी आज देश के कई राज्यों में आई बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। उनकी फसलें चौपट हो चुकी हैं। प्रकृति का कहर कभी सूखा तो कभी बाढ़ के रूप में किसानों पर कहर बनकर टूट रहा है। आजादी के सत्तर सालों बाद भी किसानों और मजदूरों की बदहाल स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। पूंजीपतियों और साहूकारों के शोषण और दमन का सिलसिला बदस्तूर जारी है। ऐसे में मुंशी प्रेमचंद का समूचा साहित्य आज भी प्रासंगिक है।”
परिचर्चा में वरिष्ठ लेखक प्रदीप श्रीवास्तव और सुभाष वर्मा ने मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि प्रेमचंद भारत के 130 करोड़ लोगों में कहीं न कहीं परिलक्षित हो ही जाते हैं।
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