मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भाजपा के एजेंट की तरह काम किया : संजय सिंह

लखनऊ, 20 जनवरी (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता संजय सिंह ने सोमवार को यहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए.के. ज्योति पर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया।

सिंह ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए़़ के. ज्योति की सेवानिवृत्ति तीन दिन बाद होने वाली है, मगर उन्होंने जाते-जाते आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार देकर भाजपा के एजेंट के तौर पर असंवैधानिक फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को अदालत से इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा है।

यहां वीवीआईपी गेस्ट हाउस में बुलाई गई प्रेसवार्ता में सिंह ने सवालिया लहजे में कहा, “जब इन विधायकों को बतौर संसदीय सचिव कोई सुविधा दी ही नहीं गई, तो फिर यह लाभ का पद कैसे हो गया।”

उन्होंने पहले का एक उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली में ही शीला दीक्षित की सरकार के कार्यकाल में 19 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया था और जब उनके लाभ के पद की बात उठी तो उन्होंने इस मामले में पूर्व से लागू होने वाले फैसले के तौर पर राष्ट्रपति से मंजूरी ले ली थी।

संजय सिंह ने कहा, “इसी तरह झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव बनाए गए, उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया और जब सवाल उठा तो पूर्व से प्रभावी कानून बनाकर बाधा दूर कर ली गई। हरियाणा में चार विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया। मामला अदालत गया तो उनकी बतौर संसदीय सचिव नियुक्त रद्द हुई, मगर बतौर विधायक सदस्यता नहीं गई। ऐसा ही पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी हुआ।”

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए बगैर इन विधायकों का पक्ष सुने उनकी सदस्यता रद्द कर दी, इससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल पैदा होता है।

सिंह ने कहा, “केन्द्र की मोदी सरकार के कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं के औचित्य पर ही सवाल उठने लगा है। हर जगह इंसाफ का गला दबाने की कोशिश की जा रही है। अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायाधीशों को खुद मीडिया के सामने आकर यह कहना पड़ा कि लोकतंत्र खतरे में है।”

सिंह ने कहा, “चुनाव आयुक्त ए़ के. ज्योति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपने पुराने रिश्तों का ख्याल रखा। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो ज्योति उनके मुख्य सचिव हुआ करते थे।”

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से इस्तीफा मांगे जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संजय सिंह ने कहा कि उन्हें सबसे पहले इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांगना चाहिए, क्योंकि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो वहां उन्होंने भी अपने विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था।

दिल्ली कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनका तो इतिहास ही देश में आपातकाल लगाने का रहा है। अपनी पार्टी के कद्दावर नेता कुमार विश्वास द्वारा चुनाव आयोग के फैसले को उचित ठहराए जाने पर संजय सिंह ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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