मुर्थल दुष्कर्म के प्रत्यक्षदर्शी सामने आए, जांच शुरू

चंडीगढ़, 27 फरवरी (आईएएनएस)। हरियाणा में जाट आन्दोलन के दौरान मुर्थल में कथित रुप से महिलाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने जांच शुरू कर दी है। शनिवार को मामले के कई प्रत्यक्षदर्शी सामने आए हैं, जिन्होंने कहा है कि गुंडों ने उनके सामने महिलाओं से बदसलूकी शुरू की थी।

इस सप्ताह के प्रारंभ में ये महिलाएं राष्ट्रीय राजमार्ग-1 से गुजर रही थीं, जब हिंसक जाट आन्दोलन शुरू हो गया, जहां उनके साथ कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई।

एक प्रौढ़ सिख व्यक्ति निरंजन सिंह ने शनिवार को बताया, “उन्होंने गुंडों को यात्रियों पर हमला करते और महिला यात्रियों के कपड़े फाड़ते देखा। वे कई महिलाओं को खेतों में खींच ले गए।”

यह कथित घटना सोमवार (22 फरवरी) को हुई थी। मीडिया रपटों से सामूहिक दुष्कर्म की खबरें सामने आईं और कहा गया कि जाट आन्दोलन के दौरान 40 गुंडों के एक समूह ने कम से कम 10 महिलाओं के साथ मारपीट और सामूहिक दुष्कर्म किया।

रपट में कहा गया है कि महिलाओं को कार से खींचकर उतारा गया। उनके कपड़े फाड़े गए और खेतों में ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया। इस घटना के बाद पीड़ित महिलाओं ने पास के मशहूर ढाबे पर पहुंचकर मदद की मांग की।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी यादवेंद्र ने कहा कि उसने देखा कि कुछ लोग तीन महिलाओं और बच्चों को जाट आन्दोलनकारियों से बचा रहे थे।

यादवेंद्र उस दौरान बस में सफर कर रहे थे और पास के एक मकान में जा छुपे थे। उन्होंने कहा, “मैं कुछ दूरी पर था, लेकिन मैं स्पष्ट रूप से देख रहा था कि तीन महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए गए थे और वे उस जगह से भाग रही थीं।”

इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक जांच समिति गठित की है, जिसकी प्रमुख एक महिला उप महानिरीक्षक (डीआईजी) राजश्री सिह और दो अन्य सदस्यों में महिला पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) भारती डाबास और सुरिंदर कौर हैं। शनिवार को उन्होंने मामले की छानबीन शुरू कर दी।

जांच समिति के सदस्यों ने मुर्थल के नजदीक हसनपुर गांव का दौरा किया, जहां कथित रूप से यह घटना हुई थी।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक वाई. पी. सिघल ने शुक्रवार को जांच समिति के गठन की घोषणा करते हुए कहा था कि वे इन आरोपों की जांच करेंगे।

मीडिया रपटों में कहा गया है कि इस क्षेत्र में महिलाओं के अंत:वस्त्र व अन्य कपड़े सड़कों और खेतों में बिखरे पाए गए हैं। जाट आन्दोलन के दौरान गाड़ियों से लोगों को उतार कर आग लगा दी गई और लोग जान बचाकर भागने लगे। लेकिन गुंडों ने महिलाओं को रोक लिया और उनके कपड़े फाड़ ़डाले। फिर उन्हें पास के खेतों में ले जाकर उनके साथ दुष्कर्म किया गया।

हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी. के. दास ने शुक्रवार को कहा था कि राज्य सरकार इस कथित घटना को लेकर अत्यधिक गंभीर है और दोषियों को बख्सा नहीं जाएगा।

डीजीपी सिंघल ने निचले स्तर के पुलिसकर्मियों द्वारा मामले को दबाने के आरोपों को खारिज किया। कथित रूप से यह जानकारी मिली कि जब पीड़ित महिलाएं पुलिस वालों के पास गईं तो उनको यह कहकर टरका दिया गया कि मामला दर्ज करवाने से कुछ हासिल नहीं होगा।

इससे पहले डीजीपी ने कहा था, “मुख्य सचिव, उद्योग, देवेंद्र सिंह और पुलिस महानिरीक्षक परमजीत अहलावत ने इन आरोपों की जांच की और ये आरोप झूठे और आधारहीन साबित हुए हैं।”

बुधवार को पंजाब एवं चंडीगढ़ उच्च न्यायालय ने इस मामले में मीडिया रपटों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया था।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नरेश कुमार संघी ने कहा कि उच्च न्यायालय मूकदर्शक बन कर बैठा नहीं रह सकता और घटना के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं। उसकी जांच किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

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