पणजी, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक संसदीय समिति से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए किसी नीति की जरूरत नहीं है। यह बात समिति के सदस्य और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शांताराम नायक ने कही।
यहां कांग्रेस के राज्य मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नायक ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय की एक संसदीय समिति की एक बैठक में सोमवार को सचिव राजीव खेर सहित मंत्रालय वरिष्ठ अधिकारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल की रूपरेखा पर भ्रमित दिखे।
नायक ने कहा, “मेक इन इंडिया के तहत क्या क्या किया जाना है, इस पर काफी भ्रम है। सचिव ने तो यहां तक कह दिया कि इस पर विशेष नीति की जरूरत नहीं है, लेकिन एक सांसद के रूप में हमें पता है कि मेक इन इंडिया पर एक मसौदा नीति पर काम चल रहा है।”
नायक ने कहा कि मेक इन इंडिया पर अलग-अलग विभाग अपने तरीके से काम कर रहे हैं और उनके बीच कोई तालमेल नहीं है।
नायक ने कहा, “मेक इन इंडिया के तहत क्या-क्या आएंगे, इस पर अलग-अलग विभागों की अलग-अलग राय है। इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को अनर्थ का सामना करना पड़ सकता है।”
नायक ने कहा, “बिना किसी वैधानिक दस्तावेज के अभियान को आगे बढ़ाने से सरकार को भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है।” उन्होंने साथ ही कहा, “सरकारी अधिकारी और निजी कारोबारी मेक इन इंडिया पर बिना कोई दस्तावेज पढ़े ही मोदी की प्रशंसा करने लगे हैं, जबकि इस पर कोई दस्तावेज भी नहीं है।”
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