मोदी ओबामा संग शिखर बैठक को तैयार

न्यूयॉर्क, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। ‘डिजिटल भारत’ योजना के साथ सिलिकॉन वैली के प्रौद्योगिकीविदों का मन मोहने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सालभर के अंदर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से तीसरी बाद मिलेंगे।

न्यूयॉर्क, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। ‘डिजिटल भारत’ योजना के साथ सिलिकॉन वैली के प्रौद्योगिकीविदों का मन मोहने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सालभर के अंदर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से तीसरी बाद मिलेंगे।

रविवार को सैन होजे में भारतीय मूल के अमेरिकियों ने मोदी का रविवार को भव्य स्वागत किया, जैसा गत वर्ष मेडिसन स्क्वे यर गार्डन में हुआ था।

ओबामा से मोदी शिखर वार्ता से पहले पिछले सप्ताह वाशिंगटन में प्रथम भारत-अमेरिका रणनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता संपन्न हुआ है।

वार्ता के बाद जारी संयुक्त घोषणा में पाकिस्तान से गतिविधियां संचालित कर रहे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे अन्य ठिकानों से सक्रिय आतंकवादी संगठनों को एक खतरा स्वीकार किया गया।

द्विपक्षीय आर्थिक और रक्षा सहयोग पर जहां ओबामा से प्रमुखता से बात होगी, वहीं व्हाइट हाउस ने कहा है कि ओबामा के लिए जलवायु परिवर्तन प्रमुख मुद्दा होगा।

ओबामा के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने अपने संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे के पूर्वावलोकन में कहा है, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्रपति ओबामा की मुलाकात अहम होगी, क्योंकि भारत निश्चित रूप से एक बड़ी अर्थव्यवस्था और प्रदूषण उत्सर्जक है।”

गत सप्ताह उन्होंने कहा था, “और हम उस वार्ता को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जो हमारी भारत में हुई थी, जो इस बात पर आधारित था कि जलवायु परिवर्तन पर सफल अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाही के लिए मोदी क्या-क्या करने के लिए तैयार हैं।”

रोड्स ने कहा, “हम अमेरिका-भारत संबंधों की मजबूती के लिए, आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग आगे बढ़ाने के लिए और एशिया तथा पूरी दुनिया में राजनीतिक तथा सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की कोशिशों की सफलता में भारत महत्वपूर्ण होगा। इसलिए दोनों नेता निश्चितरूप से यह विचार करेंगे कि पेरिस में होने वाली वार्ता में उनके क्या रुख होंगे।

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस में दिसंबर में वार्ता होगी।

उम्मीद की जा रही है कि मोदी आतंवाद का भी मुद्दा उठाएंगे, क्योंकि सैन होजे में मोदी ने कहा था कि आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन दुनिया के सामने दो प्रमुख खतरे हैं और उन्होंने सभी देशों से इन दो खतरों से निपटने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था।

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