नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित इजरायल दौरा स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के प्रति भारत के दीर्घकालिक समर्थन से हटने जैसा है।
माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के संपादकीय के अनुसार, मोदी की यात्रा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध पर आधिकारिक मुहर भी है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की है कि मोदी दोनों तरफ से स्वीकृत किसी तिथि पर इजरायल का दौरा करेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इजरायल यात्रा होगी।
संपादकीय के अनुसार, “इस दौरे की विशेषता यह होगी कि दोनों देशों के बीच मौजूदा घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।”
साल 2000 में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एल.के.आडवाणी ने इजरायल का दौरा किया था। भारत ने 1992 में इजरायल के साथ पूर्ण कूटनीतिक संबंध शुरू किए थे।
माकपा ने कहा कि इजरायल में मौजूदा बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर दक्षिणपंथी और यहूदी चरमपंथी पार्टियों का प्रभुत्व है।
संपादकीय के मुताबिक, “मोदी इजरायल का दौरा ऐसे समय में करेंगे, जब नेतन्याहू सरकार फिलिस्तीन नेतृत्व के साथ राजनीतिक समाधान की संभावना को प्रभावहीन करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है।”
“एक तरफ भारत औपचारिक रूप से फिलिस्तीन की जनता के प्रति दीर्घकालीन समर्थन को बरकरार रखने की बात करता है, वहीं मोदी सरकार इस रुख से हट रही है।”
“भारत-इजरायल संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की पहल मोदी सरकार की विदेश नीति की दिशा के अनुरूप है, जो भारत को अमेरिका की भू-राजनैतिक रणनीति में उलझा देगा।”
संपादकीय के अनुसार, “यह दौरा स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र को समर्थन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का त्याग करने का संकेत होगा।”
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