नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि संसद का शीतकालीन सत्र सुचारु रूप से चल सकेगा। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
मोदी ने सत्र शुरू होने के बाद विपक्षी सदस्यों से सदन के सुचारु संचालन में सहयोग की उम्मीद जताई।
संसद का शीतकालीन सत्र 23 दिसंबर को समाप्त होगा। इसके हंगामेदार होने के आसार हैं। विपक्ष देश में बढ़ती असहिष्णुता के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार की प्राथमिकता प्रमुख विधेयकों को पारित कराने की होगी।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें भरोसा दिलाना होगा कि वे सभी को साथ लेकर चल रहे हैं।
खड़गे ने कहा, “हम शुरुआत से कहते आए हैं कि हम सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें हमें यह भरोसा दिलाना होगा कि वे सभी को साथ लेकर चल रहे हैं। संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चले, यह सुनिश्चित करना उनका काम है।”
इस सत्र में कई आर्थिक सुधार विधेयक सरकार के एजेंडे में हैं, जबकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
मोदी ने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा, “मुझे आशा है कि विचार, चर्चा और चिंतन से देश को बेहतर बनाने के लिए नए-नए विचार सामने आएंगे।”
उन्होंने कहा, “चर्चा और परिचर्चा संसद की आत्मा है।”
मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि संसद के सभी सदस्य जनता की उम्मीदों को पूरा करने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा, “मैंने कल (बुधवार) सभी विपक्षी दलों के नेताओं से बात की। यह अच्छे माहौल में हुई एक अच्छी चर्चा थी। सभी का विचार था कि संसद की कार्यवाही का संचालन सर्वश्रेष्ठ तरीके से होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा के लिए संसद से बड़ा कोई मंच नहीं है।
मोदी ने संविधान के जनक डा. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में दो दिवसीय विशेष बैठक बुलाने से पूर्व संविधान को उम्मीद की किरण बताया।
उन्होंने कहा, “हमारा संविधान उम्मीद की एक किरण व एक मार्गदर्शक है, जो हमारे पथ प्रशस्त करता है। मैं जब ‘होप’ कहता हूं, तो एच से मेरा मतलब ‘हारमनी’ (सद्भाव), ओ से ‘ऑपच्र्युनिटी’ (अवसर), पी से ‘पीपुल्स पार्टिसिपेशन’ (जन भागादीरी) और ई से ‘इक्वलिटी’ (समानता) होता है।”
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