मौखिक जवाब देने पर चुनाव आयोग को अदालत की फटकार

नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के नेता टी.टी.वी. दिनाकरन की याचिका पर लिखित जवाब दाखिल नहीं करने को लेकर सोमवार को निर्वाचन आयोग (ईसी) को फटकार लगाई।

दिनाकरन ने आगामी लोकसभा चुनाव और तमिलनाडु विधानसभा उपचुनाव हेतु अपनी पार्टी को ‘प्रेशर कूकर’ चिन्ह आवंटित करने के लिए याचिका दाखिल की थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने दिनाकरन की याचिका पर बिना लिखित जवाब दिए केवल मौखिक दलील देने के लिए चुनाव आयोग को फटकार लगाई।

ईसी के वकील ने बताया कि अदालत ने उसकी (अदालत) सहायता के लिए एक अधिकारी को उपस्थिति होने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि अदालन ने आयोग को लिखित जवाब देने का निर्देश नहीं दिया था, जिसपर प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने अपने आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था, “नोटिस जारी करें, जिसका 25 मार्च, 2019 को जवाब दिया जाए।”

चुनाव आयोग को दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए न्यायालय ने कहा कि वह मंगलवार सुबह साढ़े 10 बजे मामले की सुनवाई करेगा।

एएमएमके ने 15 मार्च को अदालत से आग्रह किया था कि उसे अपना पुराना चिन्ह ‘प्रेशर कूकर’ रखने की इजाजत दी जाए।

चुनाव आयोग ने हालांकि सोमवार को अदालत को बताया कि वह किसी भी पंजीकृत निर्दलीय उम्मीदवार या एक पंजीकृत समूह की पसंद पर उसे चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं कर सकता। आयोग ने बताया कि एएमएमके एक ऐसा समूह है, जो ईसी के साथ पंजीकृत नहीं है।

जिसपर प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने निर्दलीय उम्मीदवारों या ईसी के साथ पंजीकृत समूहों को आवंटित किए गए चिन्हों की सूची मांगी।

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