यूएस-एसईसी रिश्वतखोरी केस ख़त्म करने के लिए 1.8 करोड़ डॉलर जुर्माना देने को राज़ी गौतम व सागर अडानी

नई दिल्ली-भारतीय अरबपति कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) द्वारा लगाए गए आरोपों के निपटारे के लिए प्रस्तावित 1.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुर्माना देने पर सहमति जताई है. ये आरोप अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़े थे, जिनमें भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने या रिश्वत का वादा करने का आरोप लगाया गया था.हालांकि दोनों ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही इनका खंडन किया है.

संघीय अदालत में गुरुवार को दायर किए गए प्रस्तावित समझौते के तहत गौतम अडानी ने 60 लाख अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित जुर्माने पर सहमति जताई है, जबकि उनके भतीजे सागर अडानी 1.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमत हुए हैं. हालांकि, इस समझौते को अभी भी जज की मंज़ूरी मिलना बाकी है.

प्रस्तावित आदेशों में यह भी कहा गया है कि जुर्माने की राशि अमेरिकी ट्रेजरी को भेजी जाएगी और इस धनराशि का कोई भी हिस्सा आरोपियों को वापस नहीं किया जाएगा. अडानी परिवार इन सिविल जुर्मानों की भरपाई या प्रतिपूर्ति किसी भी स्रोत से न तो मांग सकेगा और न ही स्वीकार कर सकेगा. साथ ही, वे इन भुगतानों पर किसी प्रकार की कर छूट या टैक्स क्रेडिट का दावा भी नहीं कर पाएंगे.

हालांकि ये जुर्माने केवल सिविल मामलों में अडानी परिवार को राहत देंगे, लेकिन इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में दोबारा प्रवेश करने और अपनी आक्रामक विस्तार रणनीति फिर शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है.

इस बीच, अमेरिकी न्याय विभाग भी कथित तौर पर गौतम अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप हटाने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में अमेरिकी वकील रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर के नेतृत्व में अडानी की कानूनी टीम ने वॉशिंगटन में न्याय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर यह दलील दी थी कि अभियोजकों के पास मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत और अधिकार क्षेत्र नहीं है.

21 नवंबर 2024 को दायर एसईसी की शिकायत के अनुसार, एजेंसी ने गौतम अडानी, सागर अडानी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारियों और एज़्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड के अधिकारी सिरिल काबानेस पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एक बड़े रिश्वतखोरी नेटवर्क के तहत काम किया. कथित तौर पर इस योजना का उद्देश्य दोनों नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों को भारतीय सरकार द्वारा आवंटित अरबों डॉलर की सौर ऊर्जा परियोजना से लाभ पहुंचाना था.

कथित योजना के दौरान अडानी ग्रीन ने अमेरिकी निवेशकों से 17.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाई थी, जबकि एज़्योर पावर के शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार कर रहे थे.

अडानी समूह ने इन आरोपों से इनकार किया है. गौतम अडानी और सागर अडानी ने ब्रुकलिन की संघीय अदालत में एसईसी के मामले को खारिज करने की मांग की है.

एसईसी को गौतम और सागर अडानी को कानूनी समन भेजने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.

इस साल जनवरी में एसईसी ने एक संघीय अदालत का रुख किया ताकि हेग कन्वेंशन के तहत संधि-आधारित रास्ते को दरकिनार किया जा सके और गौतम अडानी तथा सागर अडानी को उनके अमेरिकी वकील और ईमेल के ज़रिए समन भेजा जा सके; यह कदम तब उठाया गया जब भारत के कानून और न्याय मंत्रालय ने आरोपों के संबंध में समन जारी करने के एसईसी के 14 महीने के प्रयासों पर आपत्ति जताई और उन्हें प्रभावी रूप से रोक दिया.

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