हरिद्वार, 31 जनवरी (आईएएनएस)। विद्यार्थियों को भारतीय विधा ‘योग’ और चीन की ‘ताई ची’ को मिलाकर एक नई विधा सिखाने के लिए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार और चीन की यूनान मिंजू विश्वविद्यालय के बीच ज्ञापन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के जरिए विश्व की दो पुरातन विधाओं को नजदीक लाया जा सकेगा।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और यूनान विश्वविद्यालय मिलकर एक नए पाठ्यक्रम की शुरुआत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में करने जा रहे हैं। ताई ची एक चीनी मार्शल आर्ट की पद्धति है जो यिंग और यांग को आधार मानकर मानवीय क्षमताओं को असर कारक बनाती हैं। वहीं योग मनुष्य के आंतरिक क्षमताओं को जगाकर श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करता है।
चीन से आए प्रतिनिधि समूह और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ने मिलकर ताई ची के केंद्र का अनावरण किया। इस अनावरण में चीन से आए प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के विविध कायक्रमों को जाना व उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और चीन मिलकर विश्व को परंपरागत विशेषताओं का तोहफा प्रदान कर सकते हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भारत और चीन की ऐतिहासिक परंपराओं की विशेषता बताते हुए कहा कि ताई ची शारीरिक स्वास्थ्य की संपदाओं से परिपूर्ण है तो योग मानसिक और आत्मिक संपदाओं का भंडार है। दोनों के अभ्यास से मनुष्य संपूर्ण स्वास्थ्य का उपहार नि:संदेह प्राप्त कर सकेगा। अनावरण के अवसर पर यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय चीन से आए प्रतिनिधियों ने ताई ची पद्धति का प्रदर्शन भी किया।
इस अवसर पर यूनानी मिंजू विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष लियो हैबिन, डीन प्रो जिओ जिंगडांग तथा निदेशक यू एक्सीनील, प्रोफेसर यूफैग सहित देसंविवि के प्रो. सुरेश, प्रो. सुखनन्दर, डॉ. अरुणेश, दुर्गेश द्विवेदी, डॉ. संगीता कुमारी तथा कावेरी बाली सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।
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