नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2017-2018 के लिए राजकोषीय घाटे का तीन फीसदी लक्ष्य मुश्किल प्रतीत हो रहा है, क्योंकि देश में कर्ज की स्थिति स्थिर बनी हुई है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी.के.जोशी ने एक साक्षात्कार में बीटीवीआई से कहा, “राजकोषीय घाटे के लिए तीन फीसदी का लक्ष्य फिलहाल मुश्किल प्रतीत हो रहा है। जब अर्थव्यवस्था को मदद की जरूरत है, हमें एक ऐसे दायरे में आगे बढ़ने की जरूरत है जो सरकार को कुछ लचीलापन दे सके।”
जोशी के मुताबिक, “ऋण का बोझ अत्यधिक है। हम ऋण को जीडीपी के अनुपात के बराबर लाने में सफल नहीं रहे हैं, जो भारत के लिए अत्यधिक है और यह काफी पेंचीदा मामला है।”
अर्थशास्त्री ने कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ अभूतपूर्व फैसले लेने की जरूरत है, ताकि अगले दो-तीन वर्षो में वित्तीय खर्च बनाए रखा जा सके।
हालांकि उन्होंने कहा कि ऋण का लक्ष्य बहुत अधिक नहीं है और यह वित्तीय घाटे के लक्ष्य के अनुरूप ही है।
उन्होंने कहा, “ऋण अत्यधिक नहीं होगा, यदि वित्तीय घाटे का लक्ष्य तीन फीसदी रहेगा। मैं ऋण को अत्यधिक नहीं देखता।”
जोशी ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 में तेल पर उत्पाद शुल्क अस्थाई है, जिसके आगामी वित्त वर्ष में वापस लेने की गुंजाइश है।
उन्होंने कहा कि उनकी चिंता आगामी दो-तीन वर्षों में कर के अनुरूप जीडीपी अनुपात में सुधार की है।
वह कहते हैं, “अब यह तो बजट पर ही निर्भर करेगा कि वह लोगों से कितना कर वसूल पाता है। हालांकि, छोटी अवधि के लिए कर-जीडीपी अनुपात बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है।”
dharmpath.com dharmpath