श्रीनगर/जम्मू/नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल एन. एन. वोहरा ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में सरकार गठन पर बातचीत के लिए मंगलवार को आमंत्रित किया है। मंगलवार की यह बातचीत कितनी लाभकारी होगी, यह संशय के घेरे में है क्योंकि ऐसा लग रहा है कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे से दूर हो रही हैं।
श्रीनगर में राजनैतिक सूत्रों ने कहा कि तीन हफ्ते की देरी के बाद अब राज्य में सरकार गठन के आसार बहुत धुंधले पड़ गए हैं।
श्रीनगर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायकों ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को इस बात के लिए अधिकृत किया कि वह मंगलवार को जम्मू में राज्यपाल एन. एन. वोहरा को सरकार गठन पर पार्टी के रुख से अवगत कराएं।
पीडीपी विधायकों की बैठक के बाद पीडीपी के वरिष्ठ नेता नईम अख्तर ने संवाददाताओं से कहा, “पार्टी विधायकों ने अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को इस बात के लिए अधिकृत किया कि वह राज्य में सरकार गठन के मामले में पार्टी के विधायक दल के रुख से राज्यपाल को अवगत कराएं। “
विधायकों ने महबूबा को विधायक दल का नेता नहीं चुना। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर बैठक में चर्चा तक नहीं हुई।
महबूबा अनंतनाग से सांसद हैं। इस बात की चर्चा हो रही है कि वह भाजपा को छोड़कर कांग्रेस व अन्य छोटे दलों से हाथ मिला सकती हैं।
महबूबा ने यह बात दो टूक अंदाज में साफ कर दी है कि मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले वह मोदी सरकार से इस बात का स्पष्ट आश्वासन चाहती है कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन के एजेंडे पर निश्चित समय सीमा के अंदर अमल किया जाएगा।
राज्य भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा, पूर्व उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह और भाजपा सांसद जुगल किशोर जम्मू एवं कश्मीर में सरकार गठन के मामले में असमंजस की स्थिति पर चर्चा के लिए सोमवार को भाजपा आलाकमान से मुलाकात के लिए दिल्ली रवाना हुए।
शर्मा ने कहा कि भाजपा की तरफ से कोई पूर्व शर्त नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों दलों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में जल्द ही पीडीपी-भाजपा सरकार अस्तित्व में आएगी। लेकिन, उन्होंने गठबंधन के एजेंडे पर कोई और आश्वासन देने से इनकार किया।
भाजपा नेता मंगलवार को राज्यपाल को राज्य में सरकार गठन के मामले में पार्टी के पक्ष से अवगत कराएंगे। पीडीपी और भाजपा के नेता राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात करेंगे।
महबूबा मुफ्ती ने रविवार को पार्टी सहयोगियों से कहा था कि वह ‘बिना किसी वजह के’ राज्य की मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी।
सूत्रों का कहना है कि अब यह पीडीपी और भाजपा के बीच एक-दूसरे को अस्थिर करने के खेल में बदल गया है।
इस बीच, यह भी रपट मिल रही है कि वोहरा ने राज्यपाल शासन के दौरान राज्य में कामकाज संभालने के लिए सलाहकारों की सूची तैयार कर ली है।
जम्मू एवं कश्मीर के संविधान के मुताबिक राज्य में छह महीने तक राज्यपाल शासन रह सकता है। अगर राज्यपाल को इसका यकीन हो जाए कि सरकार गठन की कोई उम्मीद नहीं है तो वह विधानसभा भंग कर राज्य में नए चुनाव का ऐलान कर सकते हैं।
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