राष्ट्रपति से मिला विपक्ष, सरकार पर लगाया आवाज दबाने का आरोप (लीड-1)

नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और संसदीय लोकतंत्र के ‘गंभीर खतरे’ में होने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने कांग्रेस की अगुवाई में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शुक्रवार को मुलाकात कर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति मुखर्जी से मिलकर विपक्षी नेताओं के दल ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कठोर नोटबंदी के फैसले पर दुख जताते हुए उनके मामले पर बयान से इनकार की बात कही गई।

विपक्षी नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय और जनता दल (यू) के शरद यादव शामिल थे।

ज्ञापन में कहा गया, “यह दुर्भाग्यपूर्ण और अभूतपूर्व है कि सरकार खुद जानबूझकर लोकसभा और राज्य सभा में बाधा उत्पन्न कर रही और कार्यवाही स्थगित कर रही है। यह वरिष्ठ मंत्रियों के इशारे पर किया जा रहा है।”

पार्टियों ने मुखर्जी को दिए ज्ञापन में कहा, “इसके अलावा प्रधानमंत्री विपक्ष को दोषी ठहराकर राष्ट्र को गुमराह कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हम संसदीय लोकतंत्र के ‘गंभीर खतरे’ में होने को लेकर चिंतित है। उन्होंने दावा किया उनकी तरफ से नोटबंदी के प्रतिकूल असर पर बार-बार चर्चा के लिए प्रयास किया गया लेकिन सरकार का रवैया हरदम विरोधी रहा।”

विपक्षी दलों में तृणमूल कांग्रेस, जनता दल-यूनाइटेड ने राष्ट्रपति से मुलाकात में हिस्सा लिया। वाम पार्टियों ने दल में शामिल नहीं होने पर कहा कि इसमें राष्ट्रपति की कोई खास भूमिका नहीं है।

पार्टियों ने सरकार से कहा कि आठ नवंबर के नोटबंदी के कदम से देश में एक गंभीर संकट पैदा हुआ है। इससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इससे देश भर में एटीएम और बैंकों के बाहर लाइन लगाने में 97 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।

पार्टियों ने नोटबंदी पर मोदी के बयान नहीं देने, सांसदों को नोटबंदी घोषणा के के बारे में तर्कसंगत ढंग से बताने, इसके लागू करने के तरीके और इससे लोगों को हुई परेशानी पर दुख जताया।

उन्होंने कहा, “हम हैरान थे जब प्रधानमंत्री की तरफ से इस तरह का कोई बयान नहीं आया, क्योंकि यह संसदीय प्रक्रिया की परंपरा में है।”

मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता मलिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर सभी लोकतांत्रिक नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

उन्होंेने कहा, “इस सरकार ने लोकतंत्र के हर सिद्धांत को तोड़ने का प्रयास किया और संसद के कार्य नहीं करने की पूरी जिम्मेदारी सरकार की है।”

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