रियो डी जेनेरियो, 8 अगस्त (आईएएनएस)। चार साल से प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे भारतीय मुक्केबाज, सारी परेशानियों को पीछे छोड़ मंगलवार को रियो सेन्टर अरेना में अपने अभियान की शुरूआत करेंगे।
भारत में मुक्केबाजी संघ को लेकर चली आ रही समस्या ने राष्ट्रीय टीम की तैयारी पर असर डाला है।
पिछले साल से सीनियर स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी नहीं हुई हैं और राष्ट्रीय महासंघ की गैरमौजूदगी में विदेशों में खेलने का मौका भी भारतीय खिलाड़ियों को नहीं मिला है।
इसका अंदाजा ओलम्पिक में हमारे मुक्केबाजों की घटती संख्या को देख कर लगाया जा सकता है। भारत की तरफ से तीन पुरुष मुक्केबाज शिव थापा (64 किलोग्राम), विकास कृष्ण यादव (75 किलोग्राम), मनोज कुमार (64 किलोग्राम) में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पहले लंदन ओलम्पिक-2012 में भारत के आठ मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था।
विकास इकलौते भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्हें वरीयता मिली है लेकिन इनमें से कोई भी खिलाड़ी पहले दौर में बाई हासिल नहीं कर पाया है। अपने भारवर्ग में विकास विश्व रैंकिंग में छठवें स्थान पर हैं। वह मिडिलवेट वर्ग में सातवें स्थान पर हैं।
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थापा भी अपने भारवर्ग की विश्व रैंकिंग में छठवें स्थान पर हैं, लेकिन वह तदर्थ समिति द्वारा कुछ गड़बड़ियों के कारण वरीयता पाने में असफल रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (एआईबीए) द्वारा बनाए गए नए मुक्केबाजी नियमों के मुताबिक ओलम्पिक में वरीयता पेशेवर मुक्केबाजी (एपीबी) और मुक्केबाजी विश्व सीरीज (डब्ल्यूएसबी) में किए गए प्रदर्शन के आधार पर तय होनी है।
तदर्थ समिति ने भारतीय मुक्केबाजों को इस नियम की जानकारी नहीं दी जिसके कारण थापा ने एपीबी में हिस्सा नहीं लिया। उन्हें अब पहले दौर में वरीयता प्राप्त मुक्केबाज से भिड़ना होगा।
विकास मंगलवार को अमेरिका के चार्ल्स कोनवेल के खिलाफ भारतीय अभियान की शुरुआत करेंगे। विकास ने 2010 में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था। देश को उनसे पदक की काफी उम्मीद है।
विकास लंदन ओलम्पिक में कुछ विवादों में फंस गए थे। वह इस बार रिकार्ड अपने नाम करने की कोशिश करेंगे।
पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स संस्थान में विकास और थापा को प्रशिक्षण देने वाले सर्विसेस के कोच बी.बी. मोहन्ती ने कहा है लंदन ओलम्पिक का अनुभव खिलाड़ियों के काम आएगा।
मोहंती ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “पहले ओलम्पिक में अच्छा प्रदर्शन करना काफी मुश्किल होता है। आपके ऊपर काफी दबाव होता है और आपके पास उससे निपटने का अनुभव नहीं होता है। विकास और शिवा दोनों ने लंदन ओलम्पिक में अपने अनुभव से सीखा है। 2012 ओलम्पिक खेलों में विकास के साथ जज गलत तरीके से पेश आए थे। वह इस बार अपने आप को साबित करने के लिए दृढसंकल्पित है।”
थापा छठवीं वरीयता प्राप्त क्यूबा के रोबेसी रामीरेज के खिलाफ बानटैमवेट श्रेणी में अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। यह उनके लिए मुश्किल मुकाबला माना जा रहा है।
शिवा ने पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। रामिरेज और शिवा इससे पहले 2010 के युवा ओलम्पिक खेलों में एक दूसरे के आमने-सामने हो चुके हैं जिसमें क्यूबा के खिलाड़ी ने जीत हासिल की थी।
मोहंती ने कहा, “शिवा ने पहले भी रामिरेज का सामना किया है। दोनों युवा ओलम्पिक खेलों में भिड़ चुके हैं। यह काफी कड़ा मुकाबला था जो किसी के पक्ष में भी जा सकता था। अब शिवा रामिरेज की ताकत और कमजोरी के बारे में ज्यादा जानता है और वह उसे हराने में सक्षम है।”
मनोज को भी अपने भारवर्ग में कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है।
2010 राष्ट्रमंडल खेलों में विजेता बनने वाले मनोज का सामना लिथुआनिया के इवाइडास पेट्रायस्कास से होगा। पेट्रायस्कास ने लंदन ओलम्पिक में 60 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
–आईएएनएस
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