नई दिल्ली – भारतीय रेलवे अब अंग्रेजों के जमाने की पहचान और गुलामी के प्रतीकों से पूरी तरह मुक्त होने और खुद को समय के साथ ट्रेंडी बनाने की राह पर है. इसी क्रम में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल अधिकारियों के लिए दशकों पुराने ‘काले कोट’ के अनिवार्य ड्रेस कोड को समाप्त करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है.
भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ा अध्याय बदलने जा रहा है. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे बंद गले के काले सूट और कोट को अब औपचारिक पोशाक (Official Dress) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. यह फैसला केवल कपड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि रेलवे की कार्यसंस्कृति से औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) को जड़ से मिटाने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है.
अब तक रेलवे में निरीक्षण, परेड और विशेष सरकारी आयोजनों के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के लिए काला कोट पहनना अनिवार्य था. यह पहनावा अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान रसूख और अनुशासन के प्रतीक के रूप में शुरू किया था. रेलमंत्री ने 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह में कहा कि चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा, हमें अंग्रेजों की आहट से दूर होना होगा और भारतीय समाधानों पर भरोसा करना होगा.
काले कोट से निजात दिलाने के साथ ही रेलमंत्री ने साल 2026 के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया है. उन्होंने ’52 हफ्ते-52 सुधार’ का लक्ष्य रखा है. इसके तहत हर हफ्ते एक नया सुधार किया जाएगा. सेवा, उत्पादन, निर्माण और सुरक्षा जैसे हर विभाग में हर सप्ताह एक नया सुधार लागू किया जाएगा.
वहीं, रेलवे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक को खुले मन से अपनाएगी ताकि पिछले 100 वर्षों की कमियों को दूर किया जा सके. साथ ही रेलमंत्री ने इनोवेशन अवार्ड्स को लागू करने की घोषणा की. रेलवे के विकास में योगदान देने वाली टीमों को ‘इनोवेशन अवार्ड’ दिया जाएगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ टीम को 1 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार मिलेगा.
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