अनुदेशकों ने समायोजन सहित 6 सूत्रीय मांगों को लेकर आमरण अनशन पर डटे अनुदेशकों ने सोमवार को कैंडिल मार्च सहित मंगलवार तक मांगों पर कार्यवाही नहीं होने पर विधानभवन घेराव की चेतावनी दी है।
वहीं आंदोलन के पांचवें दिन शिखा, श्रीराम शाही सहित पांच अनशनकारियों की हालत हालत बिगड़ गई। उन्हें प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर ही चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराई। ये सभी ‘पूर्व माध्यमिक अनुदेशक कल्याण समिति’ के बैनर तले आंदोलनरत हैं।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पटेल ने कहा, “शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009′ के अंतर्गत अंशकालिक अनुदेशकों को सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर 2013-14 से 11 माह की संविदा पर नियुक्ति किया गया।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त अनुदेशकों ने मांगों को लेकर कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने 100 बच्चों के नामांकन की बाध्यत समाप्त करने, अनुदेशकों को उप्र अध्यापक सेवा नियमावली की सेवा शर्तों में जोड़ने, आकस्मिक दुर्घटना राहत बीमा सुविधा प्रदान करने की मांग उठाई।
प्रदेश महामंत्री अजीत सिंह भाटी ने समायोजन नहीं होने तक न्यूनतम वेतमान लागू करने व 11 महीने का वेतन दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब अनुदेशक सड़कों पर उतरकर अपनी लड़ाई लडें़गे।
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