नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। विश्व में भवन निर्माण सामग्रियों की अग्रणी कंपनी लफार्ज ने इस सप्ताह की शुरुआत में ‘हाउसिंग माइक्रोफाइनेंस एकेडेमी’ के भारतीय चैप्टर की शुरूआत मुंबई में की। वर्ष 2014 में स्थापित की गई यह संस्था निम्न से मध्यम आय वाले वर्ग को घर खरीदने के लिए ऋण प्राप्त करने की योग्यता बढ़ाएगा और संभावित उत्पाद डिजाइन की जानकारी साझा करने के साथ ही आर्थिक मदद और भवन निर्माण डिजाइन भी प्रदान करेगा।
दुनिया भर में सस्ते घर की चुनौतियों पर आधारित मेकिन्से रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि विश्व में 33 करोड़ शहरी परिवार या तो खराब घरों में रहते हैं या फिर महंगे घरों के कारण आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं। वहीं, विकसित देशों में 20 करोड़ परिवार झोपड़पट्टी में रहते हैं, जबकि अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, जापान और ऑस्ट्रेलिया में 6 करोड़ से अधिक परिवार घर खरीदने के खर्च से तनाव में हैं।
शहरी प्रवास और आय वृद्धि के मौजूदा प्रचलन पर आधारित इस रिपोर्ट में अंदाजा लगाया गया है कि वर्ष 2025 तक विश्व भर में करीबन 44 करोड़ शहरी परिवार – यानी कम से कम 160 करोड़ लोग – भीड़भाड़ वाले, अयोग्य और असुरक्षित घरों में रहेंगे या फिर आर्थिक तनाव में होंगे।
लफार्ज का उद्देश्य शहरी जीवन की कायापलट में मदद करने के लिए ऐसे शहरों के निर्माण में हिस्सा लेना है जहां सभी लोगों को अच्छे और सस्ते घर मिल सकें और इसके लिए कंपनी उत्पाद एवं समाधान उपलब्ध कराएगी। जिससे ऐसे शहरों को विकसित करने में मदद मिले जो अधिक ठोस, अधिक टिकाऊ, अधिक खुबसूरत और बेहतर ढंग से एक दूसरे से जुड़े हों।
हाउसिंग माइक्रोफाइनेंस एकेडेमी की यह पहल इंटरनेशनल फाइनेंस कॉपोर्रेशन (आईएफसी) के साथ भागीदारी में की गई है, जो वल्र्ड बैंक ग्रुप का सदस्य है और विशेष रूप से निजी क्षेत्र पर केंद्रित सबसे बड़ी वैश्विक विकास संस्था है। इस साझेदारी के हिस्सेदार के रूप में लफार्ज और आईएफसी द्वारा दुनिया भर में हाउसिंग माइक्रोफाइनेंस एकेडेमी के सत्र आयोजित किए जा रहे हैं जिनकी शुरुआत गत वर्ष केन्या में हुई। आने वाले महीनों में ऐसी एकेडेमी अन्य देशों में शुरू करने की योजना है।
मुंबई में हाउसिंग माइक्रोफाइनेंस एकेडेमी का उदघाटन लफार्ज के अफॉर्डेबल हाउसिंग विभाग के डायरेक्टर फ्रानस्वा पेरॉ और हाउसिंग फाइनेंस-आईएफसी के ग्लोबल प्रोडक्ट लीड फ्रीडमेन रॉय ने किया।
इस अवसर पर लफार्ज के अफॉर्डेबल हाउसिंग विभाग के डायरेक्टर फ्रानस्वा पेरॉ ने कहा, “लंबे समय तक टिके रहने के लिए यह जरूरी है कि माइक्रोफाइनेंस को एक व्यवसाय के रूप में लिया जाए, और जिससे एक सकारात्मक सामाजिक प्रभाव का निर्भाण भी हो सके। लफार्ज का हाउसिंग माइक्रोफाइनेंस मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया गया है और अब तक 10 से अधिक देशों में इसे सफलतापूर्वक लागू भी किया जा चुका है।”
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