अरुल लुइस
अरुल लुइस
संयुक्त राष्ट्र, 18 नवंबर (आईएएनएस)। बेरूत और पेरिस में हुए आतंकवादी हमलों की पृष्ठभूमि में भारत ने लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे संगठनों को मिलने वाली वित्तीय और स्थान की मदद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया है।
सुरक्षा परिषद में भारत के उप स्थाई प्रतिनिधि भगवंत सिंह बिश्नोई ने मंगलवार को कहा कि दोनों हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ समग्र संधि (सीसीएआईटी) को अंतिम रूप देने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नाकामी को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा, “टालमटोल की कीमत हम आम तौर से इंसानी जिंदगियों की शक्ल में चुकाते हैं। सभी आतंकवादी संगठनों-दाएश (आईएस), अल शबाब या लश्कर-ए- तैयबा या अल कायदा का एक विचारधारात्मक आधार है जो मानवता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। लेकिन, सिर्फ विचारधारा आतंकवादियों को नहीं संभाले रखती। उन्हें इसके लिए धन और कार्रवाई के लिए जगह की जरूरत होती है।”
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से ये चीजें (धन-जगह) आतंकवादियों को मुहैया कराई जा रही हैं। और, यही वह जगह है जहां हमें मिलकर काम करने की जरूरत है।” ये बात उन्होंने सीसीएआईटी को जरूरी बताने के संदर्भ में कही।
सीसीएआईटी का मामला एक दशक से लटका हुआ है। आतंकवादी शब्द की परिभाषा पर विवाद है। कुछ देशों का कहना है कि इस शब्द का इस्तेमाल उनके लिए नहीं होना चाहिए जो बकौल उनके स्वतंत्रता सेनानी हैं।
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