समाचार-पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (एनवाईटी) की रिपोर्ट के अनुसार, लाइबेरिया में इबोला के बढ़ते मामलों के कारण करीब एक साल पहले 30 युवकों का एक समूह इबोला संक्रमण से जान गंवाने वालों के शवों को जलाने के लिए आगे आया, जिनसे इबोला फैलने का खतरा था। उनके इस कदम का उद्देश्य देश में इबोला महामारी के और अधिक प्रसार को रोकना तथा लोगों को इसके खतरे से बचाना था, जिसके कारण लाइबेरिया, गिनी और सियरा लियोन में मार्च 2014 तक 11,000 लोगों की जान जा चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, युवकों ने जो भी किया, उसे लाइबेरिया के कुछ लोगों ने पहले भी किया था। लेकिन पश्चिमी अफ्रीका के देशें में शवों को जलाना पारंपरिक तौर पर वर्जित है।
रिपोर्ट के अनुसार, युवकों ने लगातार चार माह तक इबोला संक्रमण से जान गंवाने वालों के शव जलाए, जिससे ग्रामीण नाराज हो गए। उन्होंने शवों को जलाने वाले स्थानों पर प्रदर्शन भी किया।
इन युवकों का उनके परंपरावादी सोच वाले परिवारों ने भी बहिष्कार कर दिया है, जो घातक बीमारी फैलने की आशंका के बावजूद शवों को जलाने की बजाय परंपरागत तरीके से उनके अंतिम संस्कार और उन्हें दफनाने के पक्षधर हैं।
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