लॉकडाउन में रद्द हवाई टिकटों के रिफंड पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली, 27 अप्रैल – सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक नोटिस जारी किया है। याचिका में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय सभी उड़ानों के टिकट देशव्यापी लॉकडाउन के कारण रद्द होने के कारण पूरी राशि वापस करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई भी शामिल हैं। पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लॉकडाउन के बाद हवाई यात्रा के लिए बुक किए गए टिकटों के पैसे वापस न करना ‘मनमानी’ है।

इस याचिका को वकील जोस अब्राहम के माध्यम से प्रवासी कानूनी सेल द्वारा लगाया गया है। याचिका में शीर्ष अदालत से आग्रह किया गया है कि वह विमानन कंपनियों द्वारा टिकटों की राशि को वापस न करने को गैरकानूनी घोषित करे। साथ ही इसे डीजीसीए द्वारा जारी नागरिक उड्डयन आवश्यकता का उल्लंघन माने। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि रद्द किए गए टिकटों से एकत्र हुई धनराशि का पूरा रिफंड देने के बजाय, एयरलाइंस एक वर्ष तक के लिए इसका क्रेडिट शेल दे रही हैं।

याचिका में नागरिक उड्डयन मंत्रालय (एमसीए) के 16 अप्रैल के कार्यालय के ज्ञापन का हवाला दिया गया है। इसमें सभी एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया था कि वे 25 मार्च से 14 अप्रैल तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के लिए बुक की गईं सभी टिकटों की पूरी राशि वापस करें।

एमसीए ज्ञापन में कहा गया है कि यदि कोई यात्री दूसरे लॉकडाउन अवधि (15 अप्रैल से 3 मई तक) के दौरान यात्रा के लिए पहले लॉकडाउन चरण के दौरान रिफंड की मांग करता तो भी एयरलाइन को बिना कोई कैंसिलेशनल चार्ज के पूरी राशि वापस करनी होगी।

याचिका में कहा गया है कि कार्यालय ज्ञापन में उन अधिकांश यात्रियों को छोड़ दिया गया है, जिन्होंने उड़ान संचालन पर प्रतिबंध लगाने से पहले टिकट बुक किया था और अप्रत्यक्ष रूप से लॉकडाउन से पहले प्रभावित होने वाली बुकिंग के लिए उन्हें क्रेडिट शेल देने की मंजूरी एयरलाइनों को दे दी गई है। हालांकि यह भी स्पष्ट रूप से डीजीसीए के रिफंड नियमों का उल्लंघन है।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने सरकार के उस निर्देश का हवाला दिया है, जो उन टिकटों को वापस करने का आदेश देता है, जिन्हें लॉकडाउन अवधि के दौरान बुक किया गया था और प्रतिबंध लगने से पहले टिकट बुक करने वाले यात्रियों को छोड़ दिया गया है।

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