धर्मशाला, 26 जुलाई (आईएएनएस)। निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे ने कहा कि तिब्बती संस्कृति का दिल माने जाने वाला ल्हासा चीन के एक शहर में तब्दील हो चुका है।
धर्मशाला, 26 जुलाई (आईएएनएस)। निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे ने कहा कि तिब्बती संस्कृति का दिल माने जाने वाला ल्हासा चीन के एक शहर में तब्दील हो चुका है।
उन्होंने कहा कि तिब्बत के लोगों को डर है कि चीन के निवासी उनकी अद्भुत संस्कृति और पहचान को संरक्षित रखने की क्षमता को कम कर देंगे।
सांगे ने आईएएनएस संवाददाता को बताया, “चीन परिषद ने 2014 में शिगात्से और चामदो कस्बों और 2015 में नइनगतरी के दर्जे को बढ़ाने की घोषणा की थी, जो अब तिब्बतियों के लिए चिंताजनक हो गई है।” सांगे इस महीने की शुरुआत में चीन सरकार के निमंत्रण पर तिब्बत में मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि ल्हासा किसी समय में दलाईलामा का केंद्र हुआ करता था।
उन्होंने कहा, “आबादी के स्थानांतरण की वजह से ल्हासा एक अन्य चीन में तब्दील हो गया है, जहां तिब्बती विस्तृत शहरी चीन से घिरी छोटी-छोटी बस्तियों में रहते हैं।”
सांगे ने कहा, “हमें डर है कि समान नकारात्मक तब्दीली शिगात्से और चामदो में भी हो सकती है। तिब्बती लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान बचाए रखने के लिए प्रयत्न करने होंगे।”
सांगे कहते हैं कि तिब्बती लोगों को डर है कि चीनी नागरिक बहुतायत संख्या में ग्रामीण और खानाबदोश तिब्बत पर अधिकार जमा लेंगे।
उन्होंने कहा, “तिब्बती लोग आधुनिकीकरण के रूप में आर्थिक विकास का स्वागत करते हैं। शहरीकरण के रूप में उनके अनुभव आर्थिक अधिकारों से वंचित, सामाजिक निष्कासन और पर्यावरणीय क्षति के रूप में सामने आए हैं।”
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र समिति के पहले उपसचिव वू यिंगजे ने आईएएनएस को बताया कि मौजूदा समय में तिब्बत में परंपरागत और आधुनिक तत्वों का मेलजोल दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, “हमने तिब्बत के 23 लाख लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए 27.37 अरब युआन (4.7 अरब डॉलर/300 अरब रुपये) खर्च किए हैं। तिब्बत में 2014 में किसानों और चरवाहों की प्रति व्यक्ति आय 7,359 युआन थी।”
वह कहते हैं, “यह भी सच है कि चीन के 90 प्रतिशत प्रवासी शहरी क्षेत्रों में काम करते हैं, जहां मुख्य लाभ चीन के प्रवासियों को ही होता है। 2000 की शुरुआत से लेकर अब तक 300,000 से अधिक खानाबदोश चरवाहे विस्थापित हो चुके हैं।
भारत और चीन की बढ़ रही निकटता पर सांगे कहते हैं, “भारत को तिब्बत को एक मुख्य मुद्दे के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि चीन सार्वजनिक रूप से कहता है कि तिब्बत एक मुख्य मुद्दा है। यदि भारत और चीन सीमा मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं या द्विपक्षीय संबंध में सुधार करना चाहते हैं तो तिब्बत के पास कोई रास्ता नहीं है।”
सांगे तिब्बत मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत में विश्वास रखते हैं।
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