चेन्नई, 20 दिसंबर (आईएएनएस)। साल 2016 भारतीय वाहन उद्योग के लिए मिलाजुला साल रहा और कर, कानून, नीति में परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद इस उद्योग की विकास दर अच्छी रही। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
चेन्नई, 20 दिसंबर (आईएएनएस)। साल 2016 भारतीय वाहन उद्योग के लिए मिलाजुला साल रहा और कर, कानून, नीति में परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद इस उद्योग की विकास दर अच्छी रही। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
मर्सिडिज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोलैंड फोल्गर का कहना है, “यह निश्चित रूप से वाहन उद्योग के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल रहा, खासतौर से सामान्य और लक्जरी वाहनों के क्षेत्र में। इस साल वाहन उद्योग को ‘इंफ्रा सेस’ और ‘लक्जरी टैक्स’ की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।”
फोल्गर ने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च क्षमता वाले डीजल इंजन की कारों पर दिल्ली में लगाए गए (अब हटा लिया गया है) प्रतिबंध से 2015 से इस खंड में आई तेजी को नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि कंपनी के राजस्व का 20 से 25 फीसदी हिस्सा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।
2016 को वाहन उद्योग के लिए बेहतर साल बताते हुए निशान इंडिया ऑपरेशंस के अध्यक्ष गुईलम सिकार्ड ने कहा कि साल के अंत में जरूर कुछ अप्रत्याशित घट गया।
सिकार्ड ने आईएएनएस को बताया, “वैश्विक बिक्री काफी अच्छी रही और भारत में पिछले साल की तुलना में वाहन उद्योग में 10 फीसदी की तेजी आई। लेकिन नवंबर के अंत में कुछ अनिश्चिताएं देखने को मिली, क्योंकि नोटबंदी के कारण अल्पकालिक रूप से अनिश्चितता का माहौल रहा।”
फोल्गर के मुताबिक, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी के कारण अल्पकालिक स्तर पर वाहन उद्योग पर असर तो पड़ेगा ही, क्योंकि लोग वाहन खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं।
वहीं, वाहन उद्योग के विकास के बारे में फोल्गर ने कहा कि इंट्री और मिड रेंज की कारों की भारतीय बाजार में सबसे अधिक बिक्री होती है और हर साल नए-नए मॉडलों के आने से इसमें और तेजी आने की संभावना है।
वहीं, दोपहिया वाहन उद्योग में इस साल अच्छी तेजी देखने को मिली। हालांकि साल के अंत में नोटबंदी के कारण बिक्री प्रभावित हुई। फिंच की रेटिंग के मुताबिक, नोटबंदी से दोपहिया वाहनों की बिक्री पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं होगा।
फ्रॉस्ट एंड सुलिवन के सलाहकार मोबिलिटी (ऑटोमोटिव एंड ट्रांसपोटेसन प्रैक्टिस) सन्नी मनजानी ने बताया कि वाणिज्यिक वाहनों के क्षेत्र में 2016 की पहली छमाही इसमें सभी खंडों के लिए बेहतर रही। खासतौर से मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (एम एंड एचसीवी) के खंड में अच्छी बिक्री रही।
मनजानी ने आईएएनएस को बताया, “एलसीवी (हल्के वाणिज्यिक वाहन) खंड बाजार में क्षमता से अधिक उत्पादन के कारण पिछले दो सालों से संघर्ष कर रहा था। हालांकि साल की दूसरी छमाही में मांग घटने (खासतौर से पुराना बदलकर नया खरीदने की मांग), जीडीपी की रफ्तार अनुमान से कम रहने और कोयला जैसे कमोडिटी का विकास दर स्थिर रहने का असर पड़ा।”
उन्होंने कहा कि सरकार अप्रैल 2017 से बीएस-4 उत्सर्जन मानक लागू कर रही है, जिससे लघु अवधि में मार्च 2017 तक मांग बढ़ने की संभावना है।
जीएसटी के बारे में मनजानी ने कहा कि ज्यादा संभावना है कि वाणिज्यिक वाहनों के लिए कर की दर 28 फीसदी होगी, इससे वाहन की लागत 2 से 3 फीसदी कम होगी।
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