मुंबई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। देश के उत्पादन क्षेत्र में जुलाई माह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह इस साल के अप्रैल से सबसे उच्चस्तर पर है। यह वृद्धि उत्पादन और नए ठेके दोनों में देखने को मिली है। सोमवार को जारी व्यापक आर्थिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
निक्केई इंडिया मैनुफैक्चरिंग परचेजिग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जो कि विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन का समग्र सूचक है, जुलाई में बढ़कर 51.8 अंक पर रहा, जबकि जून में यह 51.7 पर था।
इस सूचकांक में 50 से ऊपर के अंक का मतलब है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी हो रही है, जबकि 50 से कम का मतलब एक समग्र कमी है।
इस मासिक रपट को तैयार करने वाली वित्तीय सेवा फर्म आईएचएस मार्किट के मुताबिक, भारत की विनिर्माण अर्थव्यवस्था में अप्रैल-जून तिमाही में मंदी के बाद साल 2016 की दूसरी छमाही में एक बार तेजी दिख रही है। जुलाई में उत्पादन के साथ ही नए ठेके में भी तेजी देखने को मिली है।
मार्किट के अर्थशाी और इस रपट के लेखक पौलयाना डी लीमा का कहना है, “यद्यपि उत्पादन मार्च के बाद सबसे तेज रफ्तार पर है और बैकलॉग का काम तेजी से निपट रहा है, लेकिन उद्योग में नई नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। रोजगार में मंदी से यह संकेत मिलता है कि कंपनियां कुछ हद से इस वृद्धि के जारी रहने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।”
डॉ. लीमा का कहना है कि आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करने से यह पता चलता है कि उपभोक्ता वस्तु के समग्र सुधार से कुल मिलाकर पीएमआई सूचकांक में बढ़ोतरी हुई है।
वह कहती हैं, “इसके अलावा रुपये की कमजोरी से भारतीय निर्यातकों को फायदा हुआ है। क्योंकि आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी के बाद विदेश से नए कारोबार में तेज वृद्धि हुई है।”
भारत की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में 7.9 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली, जबकि पूरे वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की दर 7.6 फीसदी रही।
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