नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। देश में चल रहे चार दिवसीय ‘इंडिया आर्ट फेयर’ में लाहौर की ‘तासीर गैलरी’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधारने की पहल के बावजूद पाकिस्तानी कलाकारों को वीजा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। देश में चल रहे चार दिवसीय ‘इंडिया आर्ट फेयर’ में लाहौर की ‘तासीर गैलरी’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधारने की पहल के बावजूद पाकिस्तानी कलाकारों को वीजा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
पाकिस्तानी दीर्घा के केवल एक ही कलाकार को वीजा दिया गया, जबकि उनमें से तीन को वीजा देने से मना कर दिया गया।
फरीदा बातूल को प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिए अंतिम क्षण में वीजा दिया गया। उन्होंने बताया कि अन्य कलाकारों को राजनीतिक कारणों से वीजा देने से मना कर दिया गया।
बातूल ने आईएएनएस को बताया, “मुझे भारत की अपनी यात्रा से एक दिन पूर्व आधी रात को वीजा दिया गया, जबकि अन्य तीन कलाकारों को वीजा नहीं दिया गया। यह स्पष्ट तौर पर एक राजनीतिक मुद्दा है। यह बेहद दुखद है और हमारी सरकार को इस पर काम करना चाहिए।”
बातूल की कृति ‘एक शहर जो उदास है’ पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति बयां करती है।
बातूल ने 2009 की लाहौर की जिंदगी को बयां किया है, जब तालिबान ने शहर पर हमला किया था। कृति में लंबी दीवारें और छतों पर रहते लोगों की जिंदगी दर्शाई गई है।
बातूल एक राजनीतिक कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने कहा, “लाहौर को दीवारों का शहर माना जाता है, इसलिए मैंने दीवार के रूपक का प्रयोग किया है। 2009 में जब तालिबान ने लाहौर पर हमला किया था तब लोगों ने अपने घरों की सुरक्षा के लिए दीवारें खड़ी करनी शुरू कर दी थी। मेरी कृति में आप दीवारों से घिरी जिंदगी देख सकते हैं।”
भारत में कलाकारों और कलाकृतियों के विरोध की घटनाओं का जिक्र करते हुए बातूल ने कहा, “पाकिस्तान में कलाकारों को ज्यादा विरोध का सामना नहीं करना पड़ता। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान सरकार कलाकारों को बहुत महत्वपूर्ण नहीं मानती।”
एक अन्य कृति ‘देखना मना है’ में पुरुषों की विभिन्न भंगिमाओं वाली 450 जोड़ी आंखों को दीवार पर टाइल्स की तरह दर्शाया गया है।
पेशे से शिक्षिका बातूल ने कहा, “यह कृति पुरुषों की घूरती नजरों की आलोचना है, जिसे दक्षिण एशिया में रहने वाली हर महिला समझ सकती है। हमे हमेशा इस बात का भान रहता है कि पुरुषों की आंखें हमारा पीछा कर रही हैं। मेरी कृति में सभी आंखें मेरी ओर देख रही हैं और मुझे आंख मार रही हैं।”
तासीर गैलरी की मालिक सनम तासीर ने कहा कि वीजा मुद्दे से हमारा उत्साह कम नहीं हुआ है।
तासीर ने कहा, “हमारी कला देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है और हमें बेहद अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।”
कला दीर्घा में जिन अन्य कलाकारों का काम प्रदर्शित किया गया है, उनमें सबा खान, मोहसिन शफी और हुमायरा आबिद शामिल हैं।
बातूल ने बताया, “ये चारों युवा कलाकार लाहौर की जिदंगी के विविध रंगों के बारे में बातें कर रहे हैं।”
मेला रविवार को समाप्त हुआ और इसमें बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के कलाकारों ने प्रमुखता से हिस्सा लिया।
dharmpath.com dharmpath