लंदन, 30 मई (आईएएनएस)। वैश्विक जलवायु, व्यापक बदलाव की कगार पर है। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के आधार पर बताया कि यह बदलाव दशकों तक कायम रह सकता है।
इस बदलाव का संबध अटलांटिक के ठंडे होने से है। इससे ब्रिटेन और आयरलैंड की गर्मियां शुष्क भी हो सकती हैं।
यह अध्ययन समुद्री प्रसार और समुद्री सतह के तापमान में दशकीय परिवर्तनशीलता के बीच संबंध के प्रेक्षणात्मक सबूतों पर आधारित है।
समुद्री सतह के तापमान की दशकीय परिवर्तनशीलता को अटलांटिक मल्टी डिकेडल ओसिलेशन (एएमओ) कहा जाता है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान केंद्र (एनओसी) के गेरार्ड मैककार्टी ने कहा, “इन परिवर्तनों का विश्व के कई क्षेत्रों में तापमान, बारिश, सूखा और यहां तक कि तूफानों की तीव्रता पर प्रभाव दिखा है।”
ये जलवायवीय चरण, समुद्री धाराओं की एक प्रणाली के तहत उत्तर की ओर गरमी की गतिविधि होने का परिणाम हैं।
गरमी की यह गतिविधि, समुद्री सतह का तापमान बदलती है, जिसका 20-30 साल की अवधि के दौरान जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
समुद्री धाराओं की शक्ति, रैपिड आरे नामक सेंसरों के एक नेटवर्क से मापी जाती है, जो एक दशक से अटलांटिक मेरिडोनल ओवटर्निग सर्कुलेशन (एएमओससी) की प्रवाह दर का डेटा संग्रहित कर रहा है।
अध्ययनकर्ताओं ने एनओसी की समुद्री स्तर देखने वाली स्थाई सेवा द्वारा बनाए गए सम्रुदी तल का 100 सालों के समुद्री स्तर डेटा का प्रयोग किया।
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैंप्टन में तटीय समुद्र विज्ञान के लेक्चरर और अध्ययन के सह-लेखक इवान हैग ने कहा, “तट पर समुदी स्तर मापने वाले ज्वार मापक से मिले पिछले 100 सालों के डेटा से समुद्री प्रसार का पुर्ननिर्माझा करके, हमने पहली बार समुद्री प्रसार और एएमओसी के बीच संबंध का प्रेक्षणात्मक सबूत पाया है।”
यह शोध ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित हुआ।
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