जबलपुर 10 नवंबर- मध्य प्रदेश में हुए बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच कर रहे विशेष कार्यदल (एसटीएफ ) की निगरानी की खातिर एसआईटी के गठन के लिए राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अफसरों की सूची सौंप दी है। अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी। गौरतलब है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सहित अन्य लोगों की तरफ से दायर की गई याचिकाओं में व्यापमं घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई थी।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय मानिकराव खानविलकर व न्यायाधीश आलोक अराधे की युगलपीठ ने पांच नवंबर को सीबीआई जांच की मांग को अस्वीकार करते हुए जांच एजेंसी एसटीएफ पर निगरानी रखने के लिए एसआईटी के गठन के आदेश पारित किए थे।
युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि एसआईटी के चेयरमैन उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे तथा सदस्य सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हों, मगर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक से कम के न हों। उनके अलावा सेवानिवृत्त सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे।
कहा गया है कि जांच एजेंसी एसटीएफ को एसआईटी के निर्देशानुसार काम करना होगा तथा रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। एसआईटी के गठन के लिए युगलपीठ ने सात नवंबर की तिथि निर्धारित की थी।
याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पिछले पांच वर्षो में सेवानिवृत्त हुए एडीजीपी रैंक के आईपीएस अधिकारियों की सूची पेश की थी। इसे युगलपीठ ने अमान्य करते हुए पुन: सूची पेश करने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करते हुए सुनवाई की तारीख 10 नवंबर तय की थी।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से वर्ष 1989 से सेवानिवृत्त एडीजीपी रैंक के अधिकारियों की सूची बंद लिफाफे में युगलखंडपीठ को दी गई।
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