मुंबई, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। एक दूरगामी असर वाले फैसले में बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोई भी कानून पूजास्थलों में महिलाओं को प्रवेश करने से नहीं रोकता। प्रवेश के मामले में लैंगिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश डी.एच.वाघेला और न्यायमूर्ति एम.एस.सोनक की पीठ ने यह फैसला एक जनहित याचिका पर दिया। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता विद्या बल और वरिष्ठ वकील नीलिमा वार्ता ने दायर की थी। इसमें अहमदनगर स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई थी।
महिलाओं के पूजास्थलों में प्रवेश के मुद्दे को उठा रहे भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड नाम के संगठन की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि वह शनिवार को महिलाओं के एक दल के साथ शनि शिंगणापुर मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करेंगी, जहां सदियों से महिलाओं को प्रवेश की मनाही रही है।
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