शरणार्थी मुद्दे पर जर्मनी में बढ़ी दरार

पुलिस के मुताबिक झड़प में तीन अधिकारी घायल हो गए। स्थानीय मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान एक फ्रीलांसर पत्रकार भी घायल हो गया।

पुलिस ने कहा कि कुल 1700 प्रदर्शनकारियों में करीब 500 लोग पेगिडा के थे, जो देश में मध्य-पूर्व के लोगों के आव्रजन का विरोध करते हैं। अब तक कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इस संख्या में इजाफा हो सकता है, क्योंकि पुलिस वीडियो क्लिप के आधार पर लोगों की पहचान कर रही है।

प्रदर्शनकारी नववर्ष की पूर्व संध्या पर कोलोन शहर में महिलाओं के साथ उत्पीड़न की उस घटना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें करीब एक हजार लोगों के एक समूह ने खासकर महिलाओं का न सिर्फ यौन उत्पीड़न किया, बल्कि लूटपाट की घटनाओं को भी अंजाम दिया।

फोकस ऑनलाइन की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी की संघीय पुलिस के पास नववर्ष की पूर्व संध्या पर अपराध की 32 शिकायतें आईं, जिनमें संलिप्त 31 संदिग्धों की पहचान उनके नाम के साथ हो गई है।

जर्मनी की संघीय पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि पहचाने गए दो तिहाई संदिग्ध शरणार्थी हैं।

उन्होंने कहा कि ये अपराध मुख्यत: शारीरिक चोट व चोरी से संबंधित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शरणार्थी इससे पहले यौन उत्पीड़न की घटनाओं में संलिप्त नहीं रहे हैं।

जर्मन मीडिया स्पीजेल ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आपराधिक शिकायतों की कुल संख्या गुरुवार को बढ़कर 200 तक पहुंच गई।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने शनिवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी ने अपराधी शरणार्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया है। मर्केल ने कहा, “यदि आपराधिक वारदातें होती हैं और लोग कानून का उल्लंघन करते हैं, तो इसका असर शरणार्थियों के शरण देने की अर्जी पर पड़ेगा।” उन्होंने कहा, “बदलाव न सिर्फ नागरिकों के हितों में है, बल्कि भारी संख्या में शरणार्थियों के हितों के अनुकूल भी है।”

मर्केल ने कहा कि चोरी की बढ़ती वारदातें और महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर कानून को सख्त करने की जरूरत है और कोलोन में हुआ हमला न सिर्फ घृणित है, बल्कि इसके लिए कानून को कड़ा करने की जरूरत है।

देश की दक्षिणपंथी पार्टियों ने देश में शरणार्थियों की संख्या पर लगाम लगाने की मांग करते हुए मर्केल से सीमा पर कड़ा नियंत्रण के लिए कहा।

इस घटना से जर्मनी के लोगों की मानसिकता पर गहरा असर पड़ा है। टेलीविजन चैनल एआरडी द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 30 फीसदी लोगों ने कहा कि कोलोन में हुई घटना के मद्देनजर वे बड़ी भीड़ से परहेज करेंगे।

मर्केल को उस वक्त बेहद प्रसिद्धि मिली थी, जब बीते साल उन्होंने 11 लाख शरणार्थियों को अपने देश में शरण देने की बात कही थी। ये शरणार्थी साल 2015 में जर्मनी पहुंचे थे।

चांसलर ने कहा कि घटना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में कई उपाय करेंगी। वे पुलिस बलों को बढ़ावा देंगी और देश की निर्वासन प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने का प्रयास करेंगी।

चांसलर ने हालांकि सांस्कृतिक सह अस्तित्व पर लगातार चर्चा का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “एक सही उत्तर देने का हमारा उत्तरदायित्व बनता है।”

नववर्ष की पूर्व संध्या पर महिलाओं के साथ हुए उत्पीड़न के खुलासे के बाद ऑस्ट्रिया व स्विट्जरलैंड जैसे यूरोप के अन्य भागों में भी ऐसे मामले सामने आने की खबरें आईं। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से यूरोप में शरणार्थियों की समस्या और बढ़ सकती है।

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