दुबई, 12 मई (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन चुन लिए गए। स्वतंत्र तौर पर यह चुनाव लड़ने वाले मनोहर का चयन निर्विरोध हुआ। मनोहर किसी बोर्ड से संबंध रखे बिना इस पद पर आसीन होने वाले पहले अधिकारी हैं।
मनोहर ने मंगलवार को बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
मनोहर का कार्यकाल दो साल का होगा और वह तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू कर देंगे।
मनोहर ने अपने बयान में कहा, मैं क्रिकेट का भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सभी सहयोगियों के साथ मिलकर काम करूंगा। क्रिकेट का इतिहास गर्व भरा और इसकी संस्कृति काफी समृद्ध रही है और मैं इसे बनाए रखने का प्रयास करूंगा।
नागपुर के मनोहर ने कहा, आईसीसी का चेयरमैन चुना जाना सम्मान की बात है। मैं खुद पर भरोसा जताए जाने को लेकर आईसीसी के निदेशकों का धन्यवाद करना चाहता हूं।
मनोहर ने कहा, “मैं इस अवसर पर बीसीसीआई में अपने सहयोगियों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने मेरे कार्यकाल के दौरान मेरा साथ दिया।”
उन्होंने कहा, “यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए अच्छा समय है क्योंकि इस समय हम 2014 के सवैंधानिक सुधारों की समीक्षा कर रहे हैं जिनका मकसद प्रशासनिक ढांचे में सुधार के साथ क्रिकेट के ढांचे में भी सुधार लाना था।”
उन्होंने कहा, “हमारा एकमात्र मकसद खेल को बढ़ाना और समर्थकों की नई पीढ़ी को अपने साथ जोड़ना है।”
बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने मनोहर के आईसीसी का चैयरमैन बनने का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी। ठाकुर ने कहा कि बीसीसीआई खेल को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए आईसीसी के साथ अपना सहयोग जारी रखेगी।
ठाकुर ने एक बयान में कहा, “बीसीसीआई मनोहर के आईसीसी के निर्विरोध चैयरमैन चुने जाने का स्वागत करती है।”
उन्होंने कहा, “मनोहर का निर्विरोध चुना जाना भारत के लिए गर्व की बात है। अपने प्रशासनिक अनुभव से वह आईसीसी को ऐसा नेतृत्व प्रदान करेंगे जोकि क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाएगा। बीसीसीआई क्रिकेट के विकास के लिए आईसीसी के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार है।”
बीसीसीआई का अध्यक्ष बनने से पहले मनोहर विदर्भ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष थे।
मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर दूसरी बार आसीन हुए थे और सात महीने इस पद पर रहे। अक्टूबर 2015 में जगमोहन डालमिया के निधन के बाद मनोहर को बीसीसीआई अध्यक्ष बनाया गया था। इसी पद की बदौलत मनोहर उसी समय से आईसीसी प्रमुख बने हुए थे। मनोहर पहली बार 2008 में बीसीसीआई अध्यक्ष बने थे और 2011 तक इस पद पर रहे थे।
उन्होंने तब बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था जब खेल 2014 आईपीएल में बडे पैमाने पर भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरा था, जिसके कारण बीसीसीआई के तत्कालीन प्रमुख एन.श्रीनिवासन को अपने पद से हटना पड़ा था।
आईसीसी की फुल काउंलिस ने अप्रैल में हुई बैठक में संवैधानिक बदलाव को मंजूरी दी थी। इसके तहत आईसीसी अध्यक्ष पद को समाप्त कर दिया गया और चेयरमैन को आईसीसी का सबसे बड़ा अधिकारी बताया गया। लेकिन, चेयरमैन वही बन सकता था, जो किसी भी बोर्ड से ताल्लुक न रखता हो। बदलाव की इसी प्रक्रिया के तहत मनोहर का चयन हुआ है, जो किसी बोर्ड से ताल्लुक नहीं रखते हैं।
आईसीसी की चयन प्रक्रिया के अनुसार आईसीसी निदेशकों को एक ऐसे सदस्या को नामांकित करना होता है जो वर्तमान में या अतीत में निर्देशक रहा हो। उम्मीदवार दो या उससे अधिक स्थायी सदस्यों के सहयोग से चुनाव लड़ने के लिए योग्य होता है।
चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र लेखा परीक्षा समिति के अध्यक्ष अदनान जैदी की देखरेख में की गई। उन्होंने प्रक्रिया को पूरा बताते हुए मनोहर को सफल उम्मीदवार करार दिया।
इस पद पर मनोहर अकेले उम्मीदवार थे और आईसीसी के निदेशकों ने बिना किसी शर्त के उनके चयन को मंजूरी दी।
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