शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा सबसे बड़ी चुनौती

श्रीनगर, 1 जुलाई (आईएएनएस)। इस साल सुरक्षाकर्मियों पर आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों को देखते हुए हिमालय की गुफा के लिए होनेवाली सालाना अमरनाथ यात्रा को करवाना मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की जम्मू एवं कश्मीर की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

श्रीनगर, 1 जुलाई (आईएएनएस)। इस साल सुरक्षाकर्मियों पर आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों को देखते हुए हिमालय की गुफा के लिए होनेवाली सालाना अमरनाथ यात्रा को करवाना मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की जम्मू एवं कश्मीर की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेजबेहरा शहर के नजदीक तीन जून को आतंकवादियों द्वारा किए गए गुरिल्ला हमले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के तीन जवान शहीद हो गए थे और 11 अन्य घायल हुए थे। इसी राजमार्ग पर पंपोर शहर के नजदीक 25 जून को किए गए दूसरे हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के आठ जवान शहीद हो गए, जबकि 22 अन्य घायल हो गए।

पंपोर हमले को अंजाम देने वाले दोनों फियादीन (आत्मघाती) आतंकवादी जबावी कार्रवाई में मौके पर ही मारे गए।

इससे पहले 23 फरवरी को जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग के नजदीक पंपोर शहर में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (ईडीआई) पर हुए आतंकवादी हमले में सुरक्षा बलों के चार जवान शहीद हो गए थे, जबकि तीन आतंकवादी भी मारे गए थे।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक कर कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत कुमार डोभाल भी शामिल हुए थे।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि आतंकवादियों ने उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप से लेकर अमरनाथ यात्रा के समूचे रूट की रेकी कर रखी है।

इस यात्रा पर जानेवाले श्रद्धालु मुख्य तौर से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का ही प्रयोग करते हैं, हालांकि कुछ वहां हवाई मार्ग से भी जाते हैं। लेकिन श्रद्धालुओं को भी आखिरी खंड की यात्रा इसी राजमार्ग से करनी होती है, चाहे वे दक्षिण कश्मीर के पहलगाम मार्ग से आएं या फिर उत्तरी कश्मीर के बालटाल मार्ग से आएं।

कश्मीरी आतंकवादियों के पोस्टर ब्वॉय बुरहाव वानी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर जारी किए गए एक वीडियो में कहा कि आतंकवादी अमरनाथ यात्रा करनेवाले श्रद्धालुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, क्योंकि यह पूरी तरह से धार्मिक कारणों से हैं।

इसी वीडियो में बुरहान ने स्थानीय पुलिसवालों को ‘सलाह’ दी कि वे अपने-अपने थानों में पड़े रहें और आतंकवादरोधी अभियानों में शामिल न हों।

खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया, “बात यह है कि बुरहान की बात पर कैसे भरोसा किया जा सकता है? हमें पहले भी ऐसे आश्वासन मिले हैं और लेकिन जब आतंकवादियों ने हमला किया तो वे बड़ी आसानी से इसका दोष भारतीय एजेंटों पर डाल देते हैं।”

वे आगे कहते हैं, “सुरक्षा हमारे लिए चिंता का विषय है और हमारा कर्तव्य है। इसलिए हम कोई जोखिम नहीं ले सकते।”

केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग की अभेद्य सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की और कंपनियों को भेजने का फैसला किया है।

अर्धसैनिक बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “अधिक मोबाइल बैंकर, अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल, अधिक स्टैटिक गार्ड और अधिक सड़क खोलने वाले दल (एसओपी) को तैनात किया जा रहा है ताकि पंपोर जैसी घटना ना हो सके।”

पंपोर हमला स्थल का दौरा कर लौटे सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस आत्मघाती हमले के दौरान एसओपी का दल सुरक्षा बलों की टुकड़ी के साथ चल रहा था, जिसने जबावी कार्रवाई की थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए एक उच्चस्तरीय केंद्रीय दल यहां पंपोर हमले के बाद ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए सुरक्षा स्थिति में सुधार पर चर्चा तथा इसके संबंध में रिपोर्ट तैयार करने पहुंचा है।

अमरनाथ यात्रा पर पिछली बार आतंकवादियों ने छह अगस्त, 2002 को हमला किया था।

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