लंदन, 15 मार्च (आईएएनएस)। शास्त्रीय संगीत सुनना अच्छा तो लगता ही है, इसके सुनने से सीखने की क्षमता और स्मृति भी विकसित होती है। यह निष्कर्ष फिनलैंड के शोधार्थियों ने एक शोध में निकाला है।
हेलसिंकी विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि शास्त्रीय संगीत सुनने से उन जीनों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जो डोपामाइन के स्राव, सिनेप्टिक न्यूरोट्रांसमिशन, सीखने की क्षमता और स्मृति से जुड़ी होती हैं। साथ ही शास्त्रीय संगीत सुनने से तंत्रिका क्षरण करने के लिए जिम्मेदार जीन कमजोर होता है।
साइनुक्लीन-अल्फा (एसएनसीए) पार्किंसंस रोग के लिए एक जोखिम वाला जीन माना जाता है और यह उस क्षेत्र में मौजूद होता है, जो संगीत का रुझान पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है।
माना जाता है कि एसएनसीए जीन के कारण ही संगीतमय आवाज निकालने वाली पक्षियों में संगीत सीखने की क्षमता होती है।
इस बारे में किए गए एक शोध में एक समूह को 20 मिनट तक डब्ल्यू. ए. मोजार्ट्स के वायलिन वादन कार्यक्रम में शामिल होने का मौका दिया गया।
इस संगीत को सुनने से श्रोताओं में उन जीनों की गतिविधियों में वृद्धि पाई गई, जिनका संबंध डोपामाइन स्राव और ट्रांसपोर्ट, सिनेप्टिक कार्य, सीखने की क्षमता और स्मृति से है।
साथ ही संगीत सुनने से उन जीनों का आकार छोटा हो गया, जिनका संबंध तंत्रिका क्षरण से है। इस प्रभाव को संगीत की तंत्रिका संरक्षण भूमिका कहा गया।
इस निष्कर्ष का उपयोग संगीत की उपचारात्मक क्षमता में किया जा सकता है।
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