गोरखनाथ मंदिर में आयोजित योगिराज बाबा गंभीरनाथ पुण्यतिथि शताब्दी वर्ष समारोह में आए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भगौलिक सीमाओं की रक्षा जहां सेना करती है, वहीं राष्ट्र की सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा संत करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी इंही विशेषताओं के कारण दुनिया में जगतगुरु के रूप में जाना गया। उन्होंने कहा, “आज फिर वह समय आ गया है सेना और संत दोनों अपने-अपने मोर्चो की कमान संभालें और भारत माता की अपराजेय ध्वज पताका विश्वाकाश में फहराने के लिए आगे बढ़ें।”
पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा, “योगिराज बाबा गंभीरनाथ एक सिद्ध योगी थे। उनकी पुण्यस्मृति के 100 वर्ष पूरे होने पर शताब्दी वर्ष के रूप में मनाया जाने वाला यह समारोह भारत का यशस्वी मार्ग प्रशस्त करेगा और भारत माता को समर्पित हम जैसों को प्रेरणा देगा।”
वहीं, गोरक्षपीठाधीश्वर महंत व सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखनाथ मंदिर का आज जो स्वरूप है, उसके पीछे नींव के पत्थर के रूप में योगिराज गंभीरनाथ का आशीर्वाद एवं उनकी तपस्या है।
इस मौके पर पुस्तक ‘आदर्श योगी : श्री श्री योगिराज बाबा गंभीरनाथ’ का विमोचन किया गया। रघुनाथ शुक्ल द्वारा हिंदी में अनूदित इस पुस्तक का पुनप्र्रकाशन सांसद आदित्यनाथ ने कराया है।
इसके अलावा जनरल वी.के. सिंह लिखित पुस्तक ‘साहस और संकल्प’ का विमोचन भी हुआ।
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