संयुक्त राष्ट्र , 14 सितम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा के नए अध्यक्ष पीटर थॉमस ने सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है और इसमें बदलाव लाने के लिए एक साथ आगे बढ़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया है।
संयुक्त राष्ट्र , 14 सितम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा के नए अध्यक्ष पीटर थॉमस ने सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है और इसमें बदलाव लाने के लिए एक साथ आगे बढ़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया है।
महासभा अध्यक्ष पद का मंगलवार को शपथ ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा, “सभी सदस्यगण इस बारे में सहमत हैं कि केवल जलवायु परिवर्तन के सुरक्षा परिणाम क्या होंगे सिर्फ इसलिए नहीं, बल्कि परिषद को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप रखने के लिए सुधार जरूरी है।”
उन्होंने कहा, “पूरे समुदाय को सुधार का मुद्दा सुलझाने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा।”
थॉमसन ने कहा, “मैं 71वें सत्र में इस गतिविधि को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।” 71वें सत्र की शुरुआत मंगलवार से ही हुई है।
भारत के संयुक्त राष्ट्र एजेंडे में सुरक्षा परिषद का सुधार ऊपर है, क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र का निर्णय लेने वाले इस संगठन में स्थाई सीट का आकांक्षी है।
पिछले सात सितंबर से शुरू हुआ महासभा का सत्र जो अभी हाल में समाप्त हुआ, उसमें बड़ी जोरशोर से सुधार का एजेंडा उठा था और इसकी ज्ञात प्रक्रिया के अनुसार कई दौर की अंतर सरकारी समझौता वार्ता (आईजीएन) भी हुई थी। लेकिन उत्साह ठंडा पड़ गया।
अब एक बार फिर यह मुद्दा उठ रहा है, थॉमसन एक बार फिर जोर लगाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, “इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कहा जाता है न कि संयुक्त राष्ट्र ‘सुरक्षा परिषद कुछ नहीं करता।”
उन्होंने कहा, “कोई आश्चर्य नहीं होगा।” अध्यक्ष ने कहा, “मैं इस पर और आईएनजी प्रक्रिया के लिए नेतृत्व नियुक्त को लेकर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श करूंगा।”
आईएनजी की प्रमुख लक्जमबर्ग की साल्वी लुकास अपने देश की संयुक्त राष्ट्र की स्थायी प्रतिनिधि का पद छोड़ रही हैं और उनका उत्तराधिकारी थॉमसन ही नियुक्त करेंगे।
थॉमसन ने कहा, “परिषद का सुधार कुछ ऐसा मुद्दा है, जिसमें सभी सदस्यों की रुचि है।” उन्होंने कहा, “महासभा के लिए यह ऐसा महत्वपूर्ण मुद्दा है कि सभी सदस्यों को इस पर मिलकर आगे बढ़ना है।”
थॉमसन हाल ही में दिल्ली आए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशमंत्री सुषमा स्वराज से मिले थे।
इनके पूर्ववर्ती अध्यक्ष मोजेन्स लाइकेटॉफ्ट ने महासभा सत्र की अपनी अंतिम बैठक में कहा, “यदि आप सुधारों के प्रति गंभीर हैं तो पांचों स्थाई सदस्यों सहित सभी प्रमुख पक्षकारों को अपना आलेख बदलना होगा और समझौता के लिए इच्छुक होना होगा।”
लाइकेटॉफ्ट ने इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सुधार वार्ताओं की बहुत ठंडी गति से बेचैन हैं। परिषद में बदलाव संबंधी इस सुधार के लिए महासभा के दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति और सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों -ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका- की पुष्टि की जरूरत है।
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