संयुक्त राष्ट्र, 26 जनवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ग्लोबल वार्मिग के प्रभावों को कम करने के लिए कार्रवाई का आह्वान करते हुए जलवायु परिवर्तन के कारण शांति और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा के लिए एक खुली बहस आयोजित की।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मामलों की प्रमुख रोजमेरी डिकार्लो ने शुक्रवार को बताया, “जलवायु-संबंधी आपदाओं से जुड़े जोखिम भविष्य की घटनाएं नहीं हैं। यह वास्तविकता के रूप में दुनिया भर के लाखों लोगों के सामने पहले से मौजूद हैं।”
उन्होंने जलवायु परिवर्तन से संबंधित सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए पहले से ही सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन के विभिन्न तरीकों का हवाला दिया और एकीकृत जोखिम मूल्यांकन ढांचे के साथ मजबूत विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने सहित तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया।
डिकार्लो ने कहा, “हम सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब हमें इसे एक सच्चाई मानते हुए मान्यता देनी होगी।”
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रशासक एचिम स्टेनर ने भी फोन के जरिए अपने विचार व्यक्त किए।
पर्यावरणविद् स्टीनर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन ‘न केवल वातावरण को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह जीवमंडल (बायोस्फेयर) को भी प्रभावित कर रहा है और विश्व इस चुनौती से निपटने के लिए जरूरी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
इतिहास में पहली बार संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) को जलवायु और मौसम की गंभीर स्थितियों पर सुरक्षा परिषद के सदस्यों को जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया गया था।
डब्ल्यूएमओ के मुख्य वैज्ञानिक पावेल काबात ने बहस में शामिल लोगों को जानकारी देने के लिए कुछ स्पष्ट वैज्ञानिक आंकड़े पेश किए।
उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसानों की एक सूची काफी लंबी है। सबसे पहले तो इससे पोषण और भोजन तक पहुंच में कठिनाई, जंगल की आग के जोखिम, वायु गुणवत्ता की चुनौतियों और पानी के कारण होने वाले संघर्ष में वृद्धि, जिससे अधिक आंतरिक विस्थापन और पलायन हो सकता है। यह तेजी से बढ़ता एक राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा है।”
सुरक्षा परिषद से और अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से कम से कम 75 सदस्यों ने बैठक में भाग लिया, जिनमें से 13 मंत्री स्तर के हैं।
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