सबरीमाला, 6 नवंबर (आईएएनएस)। सबरीमाला में प्रदर्शनकारी मंगलवार को 10 से 50 आयु वर्ग की कम से कम एक महिला पर आक्रोश जाहिर करते, धमकाते और उसे वापस लौटने पर बाध्य करते देखे गए। प्रदर्शनकारियों ने मंदिर में इस आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के निषेध की परंपरा को तोड़ने से इनकार किया।
भगवान अयप्पा मंदिर के सोमवार की शाम 5 बजे खोले जाने के बाद भक्तों ने देर रात व मंगलवार की सुबह हिंसक प्रदर्शन किए जब उन्होंने 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर की तरफ बढ़ते देखा।
दो महिलाओं को मंगलवार को पंबा के रास्ते में भक्तों ने पकड़ लिया और धमकी दी जब उन्होंने पाया कि इन महिलाओं के पास पवित्र किट (इरुमुदी केत्तु) नहीं है।
पुलिस ने कहा कि भगवान अयप्पा के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने उन्हे आगे बढ़ने से रोक दिया। ऐसा इन महिलाओं की उम्र 50 से अधिक होने के बावजूद किया गया।
नेताओं ने माइक्रोफोन पर प्रदर्शन खत्म किए जाने की घोषणा की, उसके बाद प्रदर्शन रुका। बाद में इन महिलाओं को दर्शन व पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचाने में सहयोग किया गया।
पहला प्रदर्शन सोमवार रात किया गया, जब एक 30 साल की महिला को उसके पति व बच्चे के साथ रोका गया। उग्र प्रदर्शन के बाद महिला यात्रा से पीछे हट गई।
महिला को उसके परिवार के साथ पुलिस सुरक्षा में मंगलवार की सुबह वापस घर भेज दिया गया।
केरल पुलिस ने सबरीमाला मंदिर में 50 पार आयु की दर्जन भर महिला पुलिस अधिकारियों को मंदिर के नजदीक तैनात किया है, लेकिन 10-50 आयु वर्ग की एक भी महिला मंदिर के गर्भ गृह तक नहीं पहुंची।
पिनाराई विजयन सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले का पालन करने का वादा किया लेकिन फिर भी इस पर अमल नहीं हो सका है। शीर्ष अदालत ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के पक्ष में फैसला सुनाया है।
मंदिर के कपाट आज (मंगलवार) रात 10 बजे बंद हो जाएंगे।
dharmpath.com dharmpath