बैंकॉक, 13 मई (आईएएनएस)। एक समलैंगिक जोड़ा सरोगेसी की मदद से थाइलैंड में जन्मी बच्ची के संरक्षण की कानूनी लड़ाई जीतने के बाद शुक्रवार को बच्ची सहित स्पेन के लिए रवाना हो गया।
जोड़े ने बच्ची का संरक्षण पाने की लड़ाई के अभियान के दौरान एक सोशल मीडिया पेज शुरू किया था।
स्पेन के मैनुअल सैंटोस और उनके अमेरिकी साथी गोर्डन लेक ने फेसबुक पेज पर लिखा, “आज का दिन हमारे परिवार के लिए बेहद खास दिन है। 16 महीने के बाद आज हमारे परिवार ने साथ रहने के लिए अपनी यात्रा शुरू की है।” इसके साथ इन दोनों लोगों ने अपनी बेटी कारमेन के साथ विमान में ली गई फोटो भी पोस्ट की।
जोड़े ने कहा, “कल हम अपने घर में अपने बेटे अल्वारो सहित अपने परिवार के साथ होंगे।”
समाचार एजेंसी ‘एफे न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, लेक के शुक्राणु और एक अज्ञात दाता के अंडे की मदद से थाईलैंड की एक सरोगेट महिला पटिता कुसोनरंग ने कार्मेन लेक को 17 जनवरी 2015 को जन्म दिया था।
पटिता ने अस्पताल में लेक को पितृत्व अधिकार देने संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन, जब वह बच्ची को देश से बाहर ले जाने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पूरा करने के लिए बैंकॉक स्थित अमेरिकी दूतावास नहीं पहुंची, तब समस्या उत्पन्न हो गई।
इसी जोड़े ने दो वर्ष पूर्व भारत में भी सरोगेसी की मदद से बेटा हासिल किया था। लेकिन, पटिता के साथ काम्रेन का मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से न सुलझ पाने के कारण उन्हें संरक्षण के लिए मुकदमा शुरू करना पड़ा।
थाईलैंड की एक अदालत ने 26 अप्रैल को जोड़े के पक्ष में फैसला सुनाया और लेक को पितृत्व अधिकार दे दिया।
हालांकि, जोड़े को पटिता और उनके वकील वेरुतई मनीनूचनर्ट के खिलाफ दायर किए गए मानहानि के मुकदमे के सिलसिले में फिर से थाईलैंड आना पड़ेगा।
जोड़े ने एक संदेश में कहा, “हम जल्द ही वापस आएंगे और तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि वे हमें पहुंचाए नुकसान की भरपाई नहीं कर देते।”
थाईलैंड की संसद ने फरवरी 2015 में कानून पारित किया जिसके तहत विदेशी सरोगेट मांओं की सेवा नहीं ले सकते।
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