विशाखापट्टनम, 10 फरवरी (आईएएनएस)। अर्नस्ट एंड यंग (ईवाई) ने आंध्र प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के साथ मिलकर पूर्वी तट समुद्री व्यापार शिखर सम्मेलन में भारत के समुद्री परिवहन के बारे में विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया है कि पूर्वी तट के गैर प्रमुख बंदरगाह ही समुद्री व्यापार के विकास के मार्ग में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
इस रिपोर्ट में कहा गया कि गैर प्रमुख बंदरगाहों को वित्त वर्ष 2016 में कुल ट्रैफिक का 43 फीसदी रहा, जो पिछले 10 सालों में 33 फीसदी बढ़ी है। यह बेहतर बुनियादी ढांचे, दक्षता, आधुनिकीकरण, रणनीतिक स्थान, प्रभावकारिता और नेटवर्क व लॉजिस्टिक्स के ऑप्टिमाइजेशन के कारण प्रतिस्पर्धी लागत का नतीजा है।
सरकार ने विभिन्न बंदरगाहों के विकास और उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने के लिए सागरमाला परियोजना शुरू की है। जो प्रमुख बंदरगाह है उनके विस्तार की क्षमता सीमित है, जबकि गैर प्रमुख बंदरगाहों के पास अधिक बड़ा भूमि बैंक है और बेहतर अवसंरचना है। उदाहरण के पश्चिमी किनारे पर स्थित प्रमुख बंदरगाह और सेज मुंदरा पोर्ट 23,000 एकड़ में फैला है, जबकि पूर्वी किनारे पर स्थित कृष्णापट्टनम बंदरगाह के पास 6,800 एकड़ जमीन मुख्य बंदरगाह के लिए तथा 13,000 एकड़ जमीन औद्योगिक विकास के रखा है।
इस मौके पर आंध्र प्रदेश चेंबर्स ऑफ कॉमर्स के महासचिव पोटलुरी भास्करा राव ने कहा, “भारतीय समुद्री व्यापार ने घरेलू और वैश्विक दोनों निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि सरकार के उपायों से व्यापार बढ़ा है और सरकार की योजना देश को प्रमुख उत्पादन और व्यापार हब बनाने की है। इस शोध का लक्ष्य बंदरगाह क्षेत्र के अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डालना है।”
अर्नस्ट एंड यंग इंडिया के निदेशक (कॉर्पोरेट वित्त और रणनीति) किरन माल्ला ने कहा, “अगर भारत को 2030 तक वैश्विक महाशक्ति बनना है तो उसे व्यापार अगली बड़ी छलांग के लिए तैयार होना होगा। सौभाग्य से इसके पास लंबी समुद्री रेखा के रूप में रणनीतिक लाभ मिला है, जो व्यापार के लिए एक आधार के रूप में काम कर सकता है। आधुनिक बंदरगाहों के पास आर्थिक उपरिकेंद्र बनाने के लिए सही रणनीति अपनानी होगी, जिसके लिए विश्वस्तरीय अवसंरचना का सृजन करना होगा।”
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