सम-विषम योजना को दिल्लीवासियों का मिला समर्थन

नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। बढ़ते प्रदुषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा सम-विषम योजना के आगाज का आज (शुक्रवार) पहला दिन था। इसके चलते कई सारे दिल्लीवासियों ने अपनी कारें, कैब साझा की।

कई यात्रियों ने आईएएनएस से कहा कि वह इस यात्रा से खुश हैं।

सम-विषम योजना के मुताबिक, सम-विषम पंजीकरण संख्या वाली गाड़ियां सड़क पर अलग-अलग दिन चल सकेंगी।

वनजा एस. ने आईएएनएस से कहा, “मैंने काम के लिए द्वारका जाने के लिए अपने दो सहयोगियों के साथ ऑटो साझा किया। मैं यह देख कर हैरान था कि दिल्ली की सड़कें यातायात मुक्त थीं।”

उन्होंने कहा, “कई लोग वाहन साझा कर कार्यालय आने के लिए उत्साहित हैं, भले ही ऐसा सिर्फ 15 दिनों तक ही क्यों न हो।”

सरकारी कार्यालयों में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया थी और कई कर्मचारी अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने के लिए सहकर्मियों के साथ वाहन साझा करने के लिए उत्साहित थे।

काम के लिए कनॉट प्लेस जा रहे एक अन्य कर्मचारी जानकी राम ने कहा, “सहकर्मियों के साथ बातचीत के साथ यात्रा मजेदार और पिकनिक जैसी रही।”

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “मेरी कार विषम नंबर की है। इसलिए, आज मैंने कुछ अन्य सहकर्मियों के लाथ गाड़ी चलाई।”

अधिकारी ने कहा, “यह थोड़ा थकाऊ है, लेकिन मुझे लगता है कि हम दो सप्ताह में नियमों का पालन करना सीख लेंगे।”

मौलाना आजाद चिकित्सा विज्ञान संस्थान में दंत चिकित्सक, ज्ञानेंद्र ने कहा, “मुझे लगता है कि दिल्ली में प्रदूषण रोकने का यह सही कदम है। हमें इस पहल के शुरू होने से पूर्व ही इसे सफल नहीं कहना चाहिए।”

केंद्र सरकार के कर्मचारी एस.बी. शशांक ने कहा, “मेरा कार्यालय मेरे घर से मात्र आधा किलोमीटर दूर है, इसलिए कार्यालय जाने के लिए मैंने साइकिल का सहारा लिया।”

गंगा राम अस्पताल के अनिल अरोड़ा ने हालांकि कहा कि चिकित्सकों को इस नीति से छूट मिलनी चाहिए। चिकित्सकों को अक्सर आपात चिकित्सा के लिए जाना होता है और ऐसे में वे सम-विषम संख्या वाली कारों का इंतजार नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा, “आपात स्थिति के दौरान चिकित्सकों को छूट मिलनी चाहिए। हमें समय पर पहुंचना होता है और अगर हमें देर हुई तो कोई चिकित्सा संबंधित कानूनी मामला बन सकता है।”

वकील राजीव खोसला ने भी वकीलों को छूट देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि तीन बार केजरीवाल से अपील करने के बावजूद वकीलों को सम-विषम योजना से छूट नहीं दी गई।

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