धर्मशाला, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया की सबसे रोमांचक, जटिल और चुनौतीपूर्ण ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में शुमार ‘हीरो एमटीबी हिमालया रैली’ का 12वां संस्करण सफलतापूर्वक सोमवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में संपन्न हुआ।
धर्मशाला, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया की सबसे रोमांचक, जटिल और चुनौतीपूर्ण ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में शुमार ‘हीरो एमटीबी हिमालया रैली’ का 12वां संस्करण सफलतापूर्वक सोमवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में संपन्न हुआ।
एशिया की इस सबसे पुरानी और सबसे कठिन माउंटेन बाइक प्रतियोगिता को इस बार और जटिल रूप दिया गया था, जिसमें 14 देशों के 67 राइडरों ने आठ दिनों में 650 किलोमीटर की दूरी तय की और इस दौरान 16,000 मीटर का एलिवेशन गेन किया।
हीरो एमटीबी हिमालया रैली का आयोजन करने वाली हिमाचल एडवेंचर स्पोर्ट्स एंड टूरिज्म प्रमोशन एसोसिएशन (हस्तपा) के अध्यक्ष मोहित सूद से भविष्य की योजनाओं पर आईएएनएस ने विस्तार से बात की।
यह पूछे जाने पर कि आपने यह इवेंट शुरू किया तो आपके दिमाग में क्या था, मोहित ने कहा, “हमने 2005 में जब इस साइकिलिंग रैली को शुरू किया था तो एक ही जज्बा था कि हम हिमाचल को माउंटेन बाइकिंग के नक्शे में उभारकर सामने लाएंगे। हमें पूरा विश्वास था कि हमारे पास जैसे चुनौतीपूर्ण मार्ग हैं और प्रकृति प्रदत्त जो हमें बुनियादी ढांचा मिला हुआ है, वह ट्रैक साइकिलिंग के लिए बेहद उपयुक्त है।”
भारत को ट्रैक साइकिलिंग के अनुकूल मानने के सवाल पर मोहित ने कहा, “ट्रैक साइकिलिंग में हिमालया दुनिया का सबसे बड़ा बैटलफील्ड है। पूरी दुनिया में माउंटेन बाइकिंग के लिए प्रकृति प्रदत्त ऐसा इनफ्रास्ट्रक्चर कहीं और नहीं है। इसी सोच के साथ हमने एमटीबी हिमालया रैली की शुरुआत की। रैली के इन 12 वर्षो में अब हमारे पास प्रतिभाशाली ट्रैक साइकिलिस्ट का समूह खड़ा हो चुका है।”
दो वर्ष पहले हीरो के सहयोग से देश के शीर्ष तीन राइडरों सहित चार सदस्यीय हीरो एक्शन टीम का गठन किया गया। यह टीम इस वर्ष दुनिया के जटिलतम टूर्नामेंट में शुमार ट्रांस आल्प में हिस्सा लेने भी गई, जहां उन्होंने सम्मानजनक स्थान हासिल किया। इसी टीम के दो भारतीय सदस्य देवेंद्र ठाकुर और शिवेन हीरो एमटीबी हिमालया रैली-2016 में भारतीय राइडरों में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे।
भविष्य की योजनाओं पर मोहित ने कहा, “अब हमारा लक्ष्य है कि भारत में विश्व चैम्पियन माउंटेन बाइकर तैयार करना और ऐसे प्रतिभाशाली राइडर तैयार करना जो ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करें और पदक लाएं।”
उन्होंने कहा, “हम राज्य सरकार और अपने प्रायोजकों के आभारी हैं, क्योंकि वे हमारी दूरदृष्टि को समझते हैं। इस बार हीरो एमटीबी हिमालया रैली के 12वें संस्करण में 14 देशों के राइडरों ने हिस्सा लिया। इसका मतलब है कि भारत में माउंटेन बाइकिंग में आकर्षित करने के लिए काफी कुछ है।”
मोहित ने कहा, “अभी हमारा इवेंट क्लब स्तर का है, फिर भी इसे अपार प्रतिक्रिया और सफलता मिल रही है। एक बार हमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर से आधिकारिक मान्यता मिल गई तो हमें पक्का विश्वास है कि एक दिन हम यहां विश्व चैम्पियनशिप भी कराएंगे और भारत में विश्व चैम्पियन राइडर भी पैदा होने लगेंगे।”
देश में ट्रैक साइकिलिंग की मौजूदा स्थिति और हो रही प्रगति पर मोहित ने कहा, “हमने जब 2005 में अपना सफर शुरू किया तो उस समय एक सर्वे करवाया था। तब पूरे भारत में 100 एमटीबी माउंटेन साइकिलें थीं। लेकिन, आज की तारीख में देश के लगभग हर बड़े शहर में 10-10 हजार माउंटेन साइकिलें हैं। अन्य खेलों की तरह ही माउंटेन बाइकिंग भी ओलम्पिक खेल है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए हमें अलग से कोई बुनियादी ढांचा तैयार नहीं करना है। हमारे पास प्रकृति प्रदत्त इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, सिर्फ इस प्राकृतिक बुनियादी ढांचे को अच्छी तरह इस्तेमाल करना है।”
ट्रैक साइकिलिंग के पूरे भारत में लोकप्रिय होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षो में बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई है माउंटेन बाइकिंग। पहले सीजन में जहां सिर्फ 30 राइडरों ने हिस्सा लिया था, वहीं इस बार 67 राइडरों ने हिस्सा लिया। भारत के और भी कई इलाके हैं जो ट्रैक साइकिलिंग के अनुकूल हैं, जहां इसे लोकप्रिय बनाया जा सकता है चाहे वह पूर्वोत्तर के राज्य हों, उत्तराखंड हो, गोवा हो, वेस्टर्न या ईस्टर्न घाट हों। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पर्यावरण के अनुकूल खेल है और इसके जरिए प्रदूषण कम करने के प्रति जागरूकता भी फैलाई जा सकती है।”
भारतीय राइडरों के अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की भविष्य की क्या योजनाएं हैं? इस सवाल पर मोहित ने कहा, “हमारी योजना देश के युवा प्रतिभाशाली राइडरों को केप एपिक और स्विस एपिक जैसी चोटी की प्रतियोगिताओं में ले जाने की है। इसके अलावा हम उन्हें ट्रांस आल्प्स में दोबारा ले जाने की तैयारी कर रहे हैं और इस बार हमारा लक्ष्य है कि वे शीर्ष-20 में आएं। दुनिया की शीर्ष-10 प्रतियोगिताओं में हम अपने राइडर भेजने की योजना पर काम कर रहे हैं।”
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