मनकामेश्वर मंदिर में महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग घंटों लाइन में नंगे पांव खड़े रहे। कोई हाथ में गंगाजल तो कोई दूध व फूल लेकर अपनी बारी आने के इंतजार में रहा। किसी के चेहरे पर न तो थकान थी और न ही किसी प्रकार की जल्दी। बीच-बीच में ‘बोल बम, हर-हर महादेव’ का उद्घोष होते ही सबका भक्तिभाव हिलोर मारते लगता। शिव का नाम जुबां पर आते ही हर किसी को आंतरिक ऊर्जा मिलने का एहसास होता। चेहरे पर एक अजीब सी चमक बिखर जाती।
राजधानी के अन्य शिवालयों में भी सोमवार को कुछ इसी तरह नजारा रहा। भोर से ही दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था और धीरे-धीरे दर्शन-पूजन करने को भक्तों की भारी भीड़ बढ़ती रही। कई भक्तों ने शिवालयों में ही शिव चालीसा, रुद्राभिषेक, महाभिषेक, महामृत्युंजय का जाप कराया तो कुछ ने घर में इसका आयोजन कराया।
श्रावण का महीना भोलेनाथ की अराधना का सबसे पवित्र समय होता है। शिवपुराण के अनुसार, भोलेनाथ का व्रत और दर्शन-पूजन करने वाले साधक को हर कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। खासकर सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है।
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