झांग का कहना है, “मैंने व्यायाम के रूप में 2002 से अपने सिर पर पत्थर की पाटें उठाकर साइकिल चलानी शुरू कर दी थी। मैं पत्थर की एक पाट अपने सिर पर उठाता हूं और स्वयं से कहता हूं कि इसे क्यों न आजमाऊं।” झांग पिछले 13 साल से हर सुबह चार बजे उठकर अपने सिर पर पत्थर की पाट रखकर दस किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं।
पश्चिमी देशों एवं क्षेत्रों में एक निर्धारित स्थान से दूसरे स्थान तक पत्थर ले पत्थर ले जाने वाली प्रतियोगिता नई नहीं है। इस तरह की एक प्रतियोगिता इस साल अक्टूबर में हंगरी के बुडापेस्ट में हुई थी, जिस दौरान स्कॉटलैंड की परंपरागत पोशाक पहने प्रतिभागियों ने वजनी पत्थर और चक्की के पाट उठाए थे।
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