नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एनबीसीसी (इंडिया) से कहा है कि वह नोएडा में सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के दोनों विवादित इमारतों के बीच की दूरी जांच कर बताए कि इसे भवन निर्माण के नियमों के अनुसार रखा गया है या नहीं।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा तथा न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन ने एनबीसीसी को दोनों टावरों के बीच दूरी की जांच करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इन टावरों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अवैध करार देते हुए गिराने का निर्देश दिया है।
न्यायालय को इस बात की भी सूचना दी गई कि न्यायालय के 25 जुलाई के आदेश के मुताबिक, सुपरटेक ने न्यायालय की रजिस्ट्री के पास पांच करोड़ रुपये की रकम जमा करा दी है।
इस बीच, न्यायालय ने सुपरटेक से कहा कि वह इस बात की जानकारी दे कि कुछ लोग जिन्होंने पैसे वापस करने की मांग की है, उन्होंने विवादित टावरों में फ्लैट बुक कराए हैं या नहीं।
वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने न्यायालय से आग्रह किया कि वह उनकी याचिका पर नोटिस जारी करे और सुपरटेक को जवाब दाखिल करने की मंजूरी दे, जिसपर न्यायालय ने कहा, “आपको बस इतना बताना है कि उन्होंने फ्लैट बुक कराया है या नहीं। आपको उनके पैसे वापस करने हैं।”
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख नौ अगस्त मुकर्रर की।
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