सुशासन और अर्थव्यवस्था के लिए नीतिगत सुधार के पक्ष में है संघ

नागपुर, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को ऐसी सरकारी नीतियों की वकालत की जो समाज को एकजुट करे और सभी की तरक्की, खासकर कमजोर वर्ग की तरक्की के अवसर उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि सुशासन और अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए।

भागवत ने आरएसएस के 90वें विजय दशमी संबोधन में कहा, “शासन और अर्थव्यवस्था शासक के व्यवहार पर निर्भर करती है जिसका लोग अनुसरण करते हैं। ऐसे में हमें चुनाव, प्रशासन, कर व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, औद्योगिक, शिक्षा और कृषि नीतियों में बुनियादी सुधार करने की जरूरत है।”

भागवत ने सरकार की जनधन योजना, मुद्रा बैंक योजना और कौशल विकास योजना की सराहना की। उन्होंने नीति आयोग के घोषणापत्र को सही दिशा में बताया लेकिन लोगों को सचेत किया कि देश की कायापलट अचानक नहीं हुआ करती।

उन्होंने कहा, “विरासत में मिली अर्थव्यवस्था को सामान्य हालत में लाना, राजनैतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना और प्रशासनिक तंत्र को सीधा करना एक चुनौती है। हमें विकास का लाभ समाज के निचले हिस्से तक पहुंचने और राष्ट्र निर्माण में उसकी भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों का फल देखने के लिए धैर्य रखना होगा।”

भागवत ने संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को याद किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक अन्याय और गैर बराबरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने राजनैतिक-आर्थिक ताने-बाने से इस भेदभाव को खत्म करने की व्यवस्था की।

भागवत ने बेहतर समाज के निर्माण के लिए नैतिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था में अपनाने पर बल दिया।

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