नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अनाज आपूर्ति करने के अपने आदेश का पालन करने को लेकर कोई कार्रवाई न करने पर बुधवार को केंद्र सरकार की खिंचाई की।
न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर तथा न्यायमूर्ति एन.वी.रमण की पीठ ने कहा, “अगर भारत सरकार कुछ करने में सक्षम न हुई, तो हम उसे हटा (मामले में उत्तरदाता से) देंगे।”
सर्वोच्च न्यायालय ने जनहित याचिका दायर करने वाले संगठन स्वराज अभियान से कहा कि न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चलाने के लिए वह एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें न्यायालय द्वारा दिए गए पांच या छह निर्देशों का पालन नहीं किया गया हो।
अतिरिक्त महाधिवक्ता पी.एस.नरसिम्हा ने न्यायमूर्ति लोकुर से जैसे ही मामले को खत्म करने के लिए कहा, न्यायमूर्ति ने कहा, “संसद के एक अधिनियम का उल्लंघन हुआ है, जो कोई छोटा मुद्दा नहीं है।”
महाधिवक्ता नरसिम्हा को हलफनामे में कही गई बातों को समझाने की बात करते हुए पीठ ने यह बात कही।
न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा, “संसद द्वारा पारित एक अधिनियम (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) का राज्यों द्वारा पालन किया जाना है। उनसे कहिए कि वे इस अधिनियम को लेकर चिंतित न हों। यदि राज्य संसद द्वारा पारित अधिनियम का पालन न करें, तो संविधान के तहत इससे निपटने का कोई उपाय है।”
याचिका दाखिल करने वाले संगठन ने गुजरात, बिहार व हरियाणा सहित सूखा प्रभावित राज्यों के लोगों को राहत दिलाने के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की थी।
गुजरात, बिहार व हरियाणा ने सुझाव का विरोध किया था, क्योंकि उन्होंने अपने कुछ जिलों को सूखा प्रभावित बताया था।
राज्यों द्वारा कोई उपाय न किए जाने की ओर इशारा करते हुए न्यायमूर्ति रमण ने कहा, “हम न तो कोई बदलाव देख रहे हैं और न ही महसूस कर रहे हैं, केवल फंड जारी हो गया है। कार्यप्रणाली नाकाम हो गई है। संसद के अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं हुआ है।”
उप महाधिवक्ता ने जब न्यायालय से उसके निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए कहा, तो न्यायमूर्ति रमण ने कहा, “यहां बैठकर सूखा प्रभावित 13 राज्यों की निगरानी करना क्या संभव है।”
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