नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनेताओं और समाज के विभिन्न हिस्सों ने सोमवार को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
देश के सम्मानित सांसदों में से एक सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह निधन हो गया।
राष्ट्रपति कोविंद ने ट्वीट कर उन्हें अनुभवी सांसद बताया, जिन्होंने सदन में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
राष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में कहा, “उनके निधन से बंगाल और भारत के सार्वजनिक जीवन को क्षति पहुंची है। उनके परिवार और असंख्य शुभचिंतकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।”
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को भारतीय राजनीति की एक ऐसी मजबूत शख्सियत बताया जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध किया।
मोदी ने ट्वीट कर कहा, “चटर्जी गरीबों और कमजोर लोगों के कल्याण की एक मजबूत आवाज थे। उनके निधन से दुखी हूं।”
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी श्रद्धांजलि में उन्हें ‘एक संस्थान’ बताया।
उन्होंने ट्वीट कर कहा, “वह एक संस्थान थे। दलगत राजनीति से परे सभी सांसद उनका बहुत आदर व सम्मान करते थे। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदना उनके परिवार के साथ है।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताते हुए इसे एक बड़ी क्षति बताया।
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, “सोमनाथ-दा के निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। यह हमारे लिए एक बड़ी क्षति है।”
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने चटर्जी ने निधन पर शोक जताते हुए उन्हें सशक्त एवं निष्ठावान सांसद बताया। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “एक सशक्त सांसद.लोगों के बीच लोकप्रिय और लोकसभा के महानतम वक्ताओं में से एक। भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी क्षति।”
दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके निधन से वह बेहद दुखी हैं और उन्हें ‘भारत के अब तक के सबसे महान लोकसभा अध्यक्षों में से एक’ के रूप में याद किया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कोलकाता में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता बिमान बोस ने कहा कि चटर्जी हमेशा जनता के पक्ष में बात करते थे। वह एक बेजोड़ शख्सियत, बड़े दिल वाले व बेहद सम्माननीय सांसद थे।’
माकपा ने राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने कहा, “जब भी लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर हमला किया गया तो उन्होंने आवाज उठाई। उन्होंने सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्ति के बाद भी लोकतंत्र के समर्थन वाली बैठकों व कार्यक्रमों में भाग लिया।”
तृणमूल कांग्रेस के नेता व लोकसभा सदस्य सौगत राय ने कहा कि चटर्जी की निगरानी में 5 जुलाई 2004 से शून्यकाल का सजीव प्रसारण शुरू हुआ। उनके रहने के दौरान ही 2006 में 24 घंटे का लोकसभा चैनल अस्तित्व में आया।
सौगत रॉय ने कहा, “भारतीय राजनीति में वह एक प्रकांड विद्वान थे। हम सभी जानते हैं कि 2004-2009 के बीच में सोमनाथ चटर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया था।”
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