सोलापुर(महाराष्ट्र), 12 अप्रैल (आईएएनएस)। सोलापुर लोकसभा सीट से पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी -कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे और भाजपा के महास्वामी जयसिद्धेश्वर शिवाचार्य- अप्रत्याशित रूप से अपने सामूहिक राजनीतिक शत्रु प्रकाश आंबेडकर की वजह से चिंतित हैं। आंबेडकर यहां से वंचित बहुजन अघाड़ी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार हैं।
सोलापुर(महाराष्ट्र), 12 अप्रैल (आईएएनएस)। सोलापुर लोकसभा सीट से पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी -कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे और भाजपा के महास्वामी जयसिद्धेश्वर शिवाचार्य- अप्रत्याशित रूप से अपने सामूहिक राजनीतिक शत्रु प्रकाश आंबेडकर की वजह से चिंतित हैं। आंबेडकर यहां से वंचित बहुजन अघाड़ी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे अपने गृहक्षेत्र से चौथी बार चुनाव जीतना चाहते हैं, जबकि भाजपा के महास्वामी सिद्धेश्वर 3.60 लाख लिंगायत मतों के सहारे अपनी नैया किनारे लगाना चाहते हैं।
लेकिन इस बार चुनाव मैदान में आंबेडकर के होने की वजह से दोनों नेताओं के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। आंबेडकर यहां 3.50 लाख मराठाओं के अलावा तीन लाख धांगर, तीन लाख मुस्लिम और 2.5 लाख दलित मतों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।
एक समय यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ था और पार्टी ने यहां 16 संसदीय चुनावों में 12 बार जीत दर्ज की थी।
शिंदे के लिए, पारंपरिक कांग्रेस मतदाताओं का वोट हासिल करना एक चुनौती है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि दलित, मुस्लिम, धांगर वोट पूरी तरफ से आंबेडकर के पक्ष में या लिंगायत वोट महास्वामी सिद्धेश्वर के पक्ष में न चले जाएं।
शिंदे के लिए एक बड़ी राहत की बात यह है कि भाजपा ने इस सीट से अपने मौजूदा सांसद शरद बनसोडे का टिकट काट दिया, जिन्होंने 2014 में उन्हें 1.50 लाख मतों से हरा दिया था। इसके अलावा सोलापुर सिटी सेंट्रल क्षेत्र से उनकी बेटी विधायक हैं और क्षेत्र पर अच्छा प्रभाव रखती हैं।
भाजपा ने बनसोडे के स्थान पर महास्वामी सिद्धेश्वर पर विश्वास जताया है।
बनसोडे के समर्थक सिद्धेश्वर का खेल नहीं बिगाड़ेंगे, इस बारे में पक्का कुछ नहीं कहा जा सकता। इसबीच इस सीट पर आंबेडकर के आ जाने से यहां 18 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए दोनों बड़ी पार्टियों को काफी गुणा-भाग करना पड़ रहा है। आंबेडकर इस सीट के अलावा अकोला से भी चुनाव लड़ रहे हैं।
आंबेडकर के समर्थन में भारिप बहुजन महासंघ और असदुद्दीन औवेसी की एआईएमआईएम है, तो शिंदे को राज्य में 56-पार्टियों के महागठबंधन से समर्थन हासिल है। वहीं महास्वामी सिद्देश्वर को अपने लिंगायत समर्थकों और सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन पर भरोसा है।
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