तिरुवनंतपुरम, 27 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने सौर ऊर्जा घोटाले में अपने ऊपर लगे रिश्वतखोरी के आरोप को बुधवार को खारिज कर दिया। मामले के मुख्य आरोपियों में से एक सरिता नायर ने उन पर यह आरोप लगाया है।
चांडी का यह बयान मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के सामने सरिता की पेशी के बाद आया है। सरिता ने पेशी के बाद कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि उसने 1.90 करोड़ रुपये दो किस्तों में दिए थे। इनमें से सात करोड़ रुपये की मांग चांडी ने अपने स्टाफ जिकुमोन के जरिए की थी।
चांडी ने संवाददाताओं से कहा, “उसने (सरिता) दो रुपये का जो चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया था, वह भी बाउंस हो गया। इसके बावजूद वह कह रही हैं कि उन्होंने करोड़ों रुपये रिश्वत में दी है। यह तर्कसंगत नहीं है।”
चांडी ने यह सवाल भी उठाया कि सरिता की कंपनी को राज्य सरकार से कौन से लाभ मिले हैं?
चांडी ने कहा, “राज्य सरकार ने उनकी कंपनी को कोई लाभ नहीं पहुंचाया है, न ही इस घोटाले में सरकारी खजाने को एक पैसे का भी नुकसान हुआ है।”
सरिता ने बुधवार को कहा था, “मैंने दिल्ली में थामस कुरुविला को 1.10 करोड़ दिए थे और राज्य की राजधानी में 80 लाख रुपये दिए थे। दूसरी किस्त देने के 15 दिन बाद मुझे गिरफ्तार कर लिया गया।”
सरिता ने यह भी कहा कि उसने राज्य के ऊर्जा मंत्री अर्यादन मोहम्मद को 40 लाख रुपये दिए थे।
सरिता नायर और उसके लिव-इन पार्टनर बिजू राधाकृष्णन को सौर ऊर्जा घोटाले के सिलसिले में 2013 में गिरफ्तार किया गया था।
सरिता जमानत पर जेल से बाहर है। बीजू अभी भी गिरफ्तार है। उसकी गिरफ्तारी इस आरोप में हुई है कि उसने अपनी पहली पत्नी की हत्या की है।
सरिता ने कहा, “मैं आजतक इसलिए चुप रही, क्योंकि मुझे लगता था कि जो पैसा मैंने दिया है, वह वापस मिल जाएगा। लेकिन, अब मुझे लगता है कि बोलने का समय आ गया है।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव कोडियारी बालाकृष्णन ने सरिता के आरोपों के बाद चांडी के इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस की केरल इकाई के अध्यक्ष वी.एम.सुधीरन ने चांडी का बचाव किया है। उनका कहना है कि ये अफवाहों के उस सिलसिले की कड़ी में है, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर फैलाया जा रहा है। कोई इस पर ध्यान नहीं देगा।
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