अहमदाबाद, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के नेता हार्दिक पटेल पर लगे देशद्रोह के आरोप को हटाने से संबंधित याचिका खारिज कर दी।
याचिका हार्दिक के पिता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता भरत पटेल ने 20 अक्टूबर को दाखिल की थी। न्यायाधीश जे.बी. पारदीवाला ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके अनुरोध को खारिज कर दिया।
हार्दिक सूरत में पांच दिनों से पुलिस की हिरासत में हैं।
सूरत में महानगर दंडाधिकारी की अदालत द्वारा हार्दिक की हिरासत बढ़ाए जाने की मांग खारिज होने के ठीक बाद अहमदाबाद की पुलिस अपराध शाखा ने हार्दिक को उनके पांच सहयोगियों के साथ राजद्रोह के मामले में हिरासत में ले लिया है।
वे सभी एक सप्ताह के लिए पुलिस हिरासत में हैं।
हार्दिक ने सूरत के एक युवक विपुल देसाई को खुदकुशी करने के बारे में सोचने की बजाय एक-दो पुलिस वालों की हत्या करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद पिछले सप्ताह उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया।
विपुल देसाई ने घोषणा की थी कि पटेल समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण देने की अपनी मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए खुदकुशी कर लेंगे।
हार्दिक तीन अक्टूबर को एक समाचार चैनल के रिपोर्टर के साथ देसाई से मिलने गए थे। समाचार चैनल ने जैसे ही देसाई के साथ हार्दिक की बातचीत प्रसारित की, यह सोशल मीडिया पर चारों ओर छा गई।
अहमदाबाद पुलिस अपराध शाखा ने दावा किया है कि उनके पास पीएएएस के नेताओं और समर्थकों के बीच हुई बातचीत के टेलीफोन कॉल के रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिसमें हार्दिक और उनके सहयोगी कथित तौर पर युवकों को पुलिस और भाजपा के सत्तारूढ़ नेताओं के खिलाफ हिंसा के लिए भड़का रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि इसी आधार पर उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया।
इस बीच अपराध शाखा ने एक पुलिस कांस्टेबल और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को हार्दिक के साथ सेल्फी खींचने के बाद निलंबित कर दिया है।
यह तस्वीर भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रही है।
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