हिमाचल : जहां बच्ची नहीं, उस पंचायत को धन नहीं

शिमला, 2 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने लिंग अनुपात के अंतर को रोकने के लिए अनोखा फैसला किया है। सरकार उन ग्राम पंचायतों को धन मुहैया नहीं कराएगी, जिनके क्षेत्र में लड़की का जन्म नहीं होगा, लेकिन उन ग्राम पंचायतों को इनाम देगी, जिनका लिंग अनुपात बेहतर होगा।

शिमला, 2 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने लिंग अनुपात के अंतर को रोकने के लिए अनोखा फैसला किया है। सरकार उन ग्राम पंचायतों को धन मुहैया नहीं कराएगी, जिनके क्षेत्र में लड़की का जन्म नहीं होगा, लेकिन उन ग्राम पंचायतों को इनाम देगी, जिनका लिंग अनुपात बेहतर होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से लिया गया है, जिन्होंने लैंगिक मुद्दे पर छठी बार अपनी संवेदनशीलता दिखाई है।

कांगड़ा जिले में एक सार्वजनिक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि वह उन ग्राम पंचायतों को निधि नहीं देंगे, जिनका लिंग अनुपात गिर रहा है।

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “जब उन्हें यह जानकारी मिली कि पंजाब से सटे कुछ इलाकों में लिंग अनुपात में गिरावट आ रही है, तो उन्हें गुस्सा आ गया। ऐसी पंचायतों को चेतावनी देने के लिए उन्होंने यह फैसला लिया।”

मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर स्वास्थ्य अधिकारियों को कन्या भ्रूणहत्या के लिए क्लीनिकों पर जाने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया।

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश की कुल आबादी 6,864,602 लाख है, जिनमें 3,382,729 लाख पुरुष, जबकि 3,382,729 लाख महिलाएं हैं। यहां प्रति 1,000 पुरुषों पर 972 महिलाएं हैं।

भारत के सभी जिलों के मुकाबले हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति का लिंग अनुपात शून्य से छह वर्ष तक के आयु समूह में सर्वश्रेष्ठ है। यहां प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,033 महिलाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने 22 फरवरी को दादासिबा गांव में एक जनसभा में कहा कि उन पंचायतों को कोई निधि नहीं मिलेगी, जहां महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या ज्यादा होगी। लेकिन उन पंचायतों को इनाम मिलेगा, जहां का लिंग अनुपात बेहतर होगा।

सरकार वैसे 50 पंचायतों को सम्मानित करेगी, जो शून्य से छह वर्ष तक आयु समूह में लिंग अनुपात में सुधार लाने में कामयाब रही है।

मुख्यमंत्री ने आईएएनस से कहा, “समाज को स्वस्थ बनाने के लिए पहला कदम लड़कियों को शिक्षित करना होगा।”

अपने पूरे राजनीतिक जीवनकाल में कभी वेतन नहीं लेने वाले नेता वीरभद्र सिंह ने कहा, “यदि किसी गांव में 10 बच्चियां हैं और वहां नजदीक में कोई स्कूल नहीं है, तो वहां एक स्कूल खोलने में मुझे कोई झिझक नहीं है, चाहे वह इलाका कितना भी सुदूरवर्ती क्यों न हो।”

राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले वीरभद्र सिंह एक खुले रहस्य की तरह हैं। उनके सहयोगी कहते हैं कि ऐसा कोई भी दिन नहीं बीतता होगा, जब कोई उनके कार्यालय में आर्थिक मदद के लिए न आता हो।

एक अधिकारी ने कहा, “अगर कोई अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए वित्तीय मदद की मांग लेकर उनके पास आता है, तो वह अपनी जेब से भी पैसे देने से नहीं हिचकते।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि प्रदेश का कोई भी स्कूल बिना शौचालय का हो। इसका निर्माण शिक्षा विभाग करेगा। लड़कियों के लिए अलग से शौचालय होना चाहिए।”

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