हिमाचल में अवैध संपत्ति की जब्ती करने वाला कानून वापस

शिमला, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पिछली सरकार द्वारा पारित कानून को बुधवार को वापस ले लिया। इस कानून में सरकारी कर्मचारियों की अवैध कमाई को जब्त करने तथा उनके खिलाफ मामले की त्वरित सुनवाई का प्रावधान था।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश विशेष अदालत (संपत्ति की जब्ती) विधेयक, 2011 को वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया।

सूत्रों ने आईएएनएस से कहा कि विधेयक को 30 अगस्त, 2011 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और उसे अभी राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी।

इस कानून को लाने वाले भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने विधानसभा में कहा कि यदि सरकार को प्रथम दृष्टया लगता है कि सरकारी कर्मचारी के पास भ्रष्टाचार से जमा की गई अवैध संपत्ति है, तो विशेष अदालत में एक आवेदन दिया जा सकता है।

“यदि अपराध साबित हो जाता है, तो अधिकारी को 15 दिनों का नोटिस दिया जाएगा और उससे इस बात का जवाब मांगा जाएगा कि उसकी इस तरह की संपत्ति को जब्त क्यों नहीं कर लिया जाए।”

इस तरह के अपराधों की त्वररित सुनवाई के लिए यह कानून विशेष अदालतों की स्थापना को प्रस्तावित करता था।

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